Gilgit Baltistan PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आजादी की मांग को लेकर जबरदस्त आंदोलन शुरू हो गया है। पूरे इलाके में पाकिस्तान और चीन के अवैध कब्जे के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में लोग सड़कों पर उतरकर इन नेताओं को खुलेआम आतंकी घोषित कर रहे हैं।
इस उग्र प्रदर्शन के दौरान अवामी एक्शन कमेटी ने याद दिलाया कि 1947 में कबाइलियों ने यहां अवैध रूप से जमीन पर कब्जा किया था। पहली बार गिलगित बाल्टिस्तान, लद्दाख और जम्मू के लोग इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि कश्मीर में एक जान जाने पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आते हैं। अब तक इस हिंसक आंदोलन में 53 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन लोग रावलाकोट में डटे हुए हैं।
पाकिस्तानी सेना और क्रूर हुकूमत के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब पूरी तरह से बगावत में बदल चुका है। हालांकि अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं के बीच इस आंदोलन के तरीके को लेकर कुछ आपसी मतभेद भी साफ नजर आ रहे हैं। सरदार अमान खान और ख्वाजा मेहरान खुलेआम पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर उमर नजीर और शौकत नवाज मीर बातचीत के जरिए अपनी मांगों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश में हैं।
इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों की दो सबसे प्रमुख मांगों पर पाकिस्तान सरकार के साथ पेंच फंसा हुआ है। पहली मांग पीओके के अंदर 12 कथित शरणार्थी सीटों को पूरी तरह से खत्म करने को लेकर है जिसे जनता नकार रही है। दूसरी मांग पीओके के निर्वाचित नेताओं के शपथ ग्रहण से जुड़ी है जिसमें वफादारी की शर्तों को बदलने की बात की गई है।
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जनता चाहती है कि नेताओं की शपथ में पाकिस्तान के प्रति वफादारी की जगह जम्मू कश्मीर की एकता की बात हो। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट मानना है कि पीओके कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहा है और न ही रहेगा। 53 मौतों के बावजूद यह आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है और पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ लगातार उग्र रूप धारण करता जा रहा है।