

Defence Sector Pakistan Budget 2026-27 News In Hindi: आर्थिक तंगहाली और भारी विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना वार्षिक बजट पेश कर दिया है। शुक्रवार को नेशनल असेंबली में पेश किए गए इस बजट का कुल परिव्यय (outlay) 18.77 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए (लगभग 67.49 अरब डॉलर) रखा गया है। इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक तरफ जहां मुल्क दिवालिया होने की कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने रक्षा खर्च में जबरदस्त इजाफा किया है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने बजट पेश करते हुए घोषणा की कि जुलाई से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष में रक्षा के लिए 3 ट्रिलियन (तीन हजार अरब) रुपए आवंटित किए जाएंगे। यह पिछले साल के 2.55 ट्रिलियन रुपए के रक्षा बजट की तुलना में 18 फीसदी अधिक है। इसके ठीक विपरीत, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की अनदेखी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा पर सरकारी खर्च 23% घटकर महज 962 अरब रुपए रह गया है। अब पाकिस्तान की जीडीपी (GDP) में शिक्षा का हिस्सा घटकर सिर्फ 0.8% रह गया है, जो किसी भी देश के भविष्य के लिए चिंताजनक संकेत है।
बजट के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि सरकार ने सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के बजट को काफी सीमित कर दिया है। संघीय विकास खर्च के लिए केवल 1 ट्रिलियन रुपए आवंटित किए गए हैं, जो रक्षा बजट का महज एक तिहाई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला दिखाता है कि इस्लामाबाद आर्थिक दबावों के बावजूद अपनी सैन्य तैयारियों को प्राथमिकता दे रहा है।
बजट में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में 7% की बढ़ोतरी की गई है और न्यूनतम मजदूरी को 10% बढ़ाने का प्रस्ताव है। हालांकि, एक चौंकाने वाले फैसले में सरकार ने अमीर वर्ग पर लगने वाले 9% सरचार्ज को हटा दिया है, जिसकी आलोचना हो रही है। सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए 4% जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य रखा है।
पाकिस्तान का यह बजट पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 7 अरब डॉलर के प्रोग्राम को पटरी पर बनाए रखने की कोशिशों पर केंद्रित है। सरकार ने 15.26 ट्रिलियन रुपए का भारी-भरकम टैक्स रेवेन्यू लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल से 8.2% अधिक है। राजकोषीय घाटे को GDP के 3.6% तक सीमित रखने का लक्ष्य है। हालांकि, इन लक्ष्यों को हासिल करने का सीधा बोझ सैलरी पाने वाले मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा, क्योंकि टैक्स कटौती की अब कोई गुंजाइश नहीं बची है।