US-Iran Peace Deal: पीएम मोदी ने किया अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत, बोले- इससे दुनिया में आएगी शांति

US Iran Peace Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का दिल खोलकर स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस डील से वैश्विक अर्थव्यवस्था और पश्चिम एशिया में स्थिरता आएगी।
US-Iran Peace Deal: PM Modi welcomes the US-Iran agreement, says it will bring peace to the world.
नरेन्द्र मोदी, फोटो ( सो. सोशल मीडिया)
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PM Modi On US Iran Peace Deal: दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक और सैन्य मुसीबतों में से एक अब खत्म होने की कगार पर है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने के लिए दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते का ऐलान कर दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बड़े वैश्विक घटनाक्रम का स्वागत किया है और इसे दुनिया के लिए एक राहत भरी खबर बताया है।

पीएम मोदी ने 'X' पर व्यक्त की खुशी

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के माध्यम से इस शांति समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि इस लंबे संघर्ष के कारण न केवल क्षेत्र में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, बल्कि पूरी दुनिया को गंभीर आर्थिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने से व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी और एक स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।

होर्मुज को फिर से खोल दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की है। ट्रंप के अनुसार, ईरान के साथ 14 प्रमुख शर्तों पर सहमति बनी है। इस समझौते का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा, क्योंकि ट्रंप ने ऐलान किया है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को भी तत्काल प्रभाव से हटाने की मंजूरी दे दी गई है।

जिनेवा में होगा आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह

दोनों देशों के बीच बनी इस सहमति को अंतिम रूप देने के लिए 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में एक भव्य हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जाएगा। यदि यह डील आधिकारिक तौर पर साइन हो जाती है, तो यह पिछले 47 वर्षों में वाशिंगटन और तेहरान के बीच पहली उच्च स्तरीय बैठक होगी। व्हाइट हाउस से 'सफेद धुआं' निकलने को इस बात का पुख्ता संकेत माना जा रहा है कि दोनों देश अब युद्ध के बजाय कूटनीति के रास्ते पर चलने को तैयार हैं।

ईरान की शर्तें और आगे की राह

ईरान ने भी इस समझौते को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए अमेरिका को तीन मुख्य कदम उठाने होंगे। जिसमें पहले नेवी को नाकेबंदी हटानी होगी इसके साथ ही सभी सैन्य कार्रवाइयां रोकना और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को रिलीज करना होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने 12 अरब डॉलर की राशि जारी करने और तेल पर लगी पाबंदियां पूरी तरह हटाने की शर्त रखी है। भारत सहित दुनिया भर के देशों को उम्मीद है कि इस समझौते से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला फिर से सुचारू हो सकेगी।

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