आतंकियों की अब खैर नहीं! भारत और न्यूजीलैंड ने मिलाया हाथ, साइबर सुरक्षा पर भी बड़ा फैसला
PM Modi New Zealand Visit: प्रधानमंत्री मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन ने सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने के लिए 'जॉइंट वर्किंग ग्रुप' बनाने का निर्णय लिया है। इसमें आतंकवाद जैसे मुद्दे पर जोर दिया गया।
- Written By: अमन उपाध्याय
भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद और साइबर अपराध के खिलाफ बढ़ाया हाथ, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
PM Modi New Zealand Visit Counter Terrorism MOU: भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ते हुए शनिवार को सुरक्षा सहयोग को गहरा करने का साझा संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके न्यूजीलैंड के समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने पर सहमति बनी।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देश अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर आपसी जुड़ाव को और अधिक मजबूत करेंगे।
आतंकवाद पर कड़ा प्रहार
‘जीरो-टॉलरेंस’ की नीति बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद के प्रति अपने कड़े रुख सामने रखे। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की बिना शर्त निंदा की। बयान में विशेष रूप से 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना का भी जिक्र किया।
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मोदी और लक्सन ने इन हमलों के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने और आतंकवाद के फाइनेंसिंग नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह खत्म करने का आह्वान किया गया।
जॉइंट वर्किंग ग्रुप का गठन
आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई को संगठित रूप देने के लिए, दोनों देशों ने काउंटर-टेररिज्म पर एक ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ (JWG) बनाने के लिए समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह वर्किंग ग्रुप दोनों देशों के बीच जानकारी और तकनीकी ज्ञान साझा करने के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार करेगा।
साइबर चुनौतियों पर सहयोग
सुरक्षा की बात केवल आतंकवाद तक सीमित नहीं रही। पीएम मोदी और लक्सन ने अवैध ड्रग तस्करी, वित्तीय अपराध, साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों से निपटने के लिए व्यावहारिक कानून प्रवर्तन सहयोग को मजबूत करने का वादा किया है। दोनों देश जल्द ही अपनी संबंधित एजेंसियों के बीच काउंटर-नारकोटिक्स और कानून लागू करने के सहयोग को औपचारिक रूप देने की दिशा में काम करेंगे।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और संप्रभुता का विजन
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति पर चर्चा करते हुए, दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र, खुले और खुशहाल क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था का पालन होना चाहिए। इसके साथ ही, समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) के तहत नेविगेशन की आजादी और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
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आसियान की केंद्रीय भूमिका को मान्यता
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए दोनों पक्षों ने आसियान (ASEAN) के नेतृत्व वाले मंचों, जैसे ईस्ट एशिया समिट और आसियान रीजनल फोरम में सहयोग के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने हिंद-प्रशांत को लेकर आसियान के नजरिए और इसकी केंद्रीय भूमिका को फिर से दोहराया, जो इस क्षेत्र की स्थिरता और भविष्य की समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
