पाकिस्तान सिंध असेंबली, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Pakistan Hindu MLA Anil Kumar Proposal On Alcohol Ban: पाकिस्तान के सिंध प्रांत की विधानसभा में 12 फरवरी 2026 को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। आमतौर पर इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और परंपराओं को लेकर अलग बहस होती है लेकिन यहां मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान के हिंदू विधायक अनिल कुमार ने पूरे प्रांत में शराबबंदी का प्रस्ताव पेश कर दिया।
यह मामला इसलिए अनोखा बन गया क्योंकि जहां एक हिंदू नेता शराब पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग कर रहा था वहीं मुस्लिम मंत्रियों और सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया।
विधायक अनिल कुमार ने सदन में दलील दी कि पाकिस्तान में शराब की बिक्री के लाइसेंस मजहबी और धार्मिक आधार पर जारी किए जाते हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि हिंदू समुदाय के नाम पर शराब बेची जाती है जिससे पूरे समुदाय को रुसवाई और बदनामी का सामना करना पड़ता है। कुमार ने जोर देकर कहा कि हिंदू धर्म में शराब का निर्माण, बिक्री और सेवन पूरी तरह से वर्जित है फिर भी लाइसेंस वितरण में उनके समुदाय का नाम इस्तेमाल किया जाना अनुचित है।
Is alcohol still haram in Islam ? pic.twitter.com/S5AKJw7BzD — THE UNKNOWN MAN (@Theunk5555) February 12, 2026
अनिल कुमार ने सदन में स्पष्ट लहजे में कहा कि अगर मुस्लिम भाई शराब पीना चाहते हैं, तो वे खुद कोई रास्ता निकालें, लेकिन इसके लिए हिंदू समुदाय को जिम्मेदार न ठहराएं। उन्होंने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक हित और सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए अनिवार्य बताते हुए सभी मौजूदा लाइसेंसों को रद्द करने की मांग की।
सिंध के गृह मंत्री जिया उल हसन लंजार ने सरकार की ओर से इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान में शराब की बिक्री पहले से ही एक नियंत्रित लाइसेंसिंग सिस्टम के तहत होती है जो मुख्य रूप से गैर-मुस्लिम नागरिकों और विदेशियों के लिए आरक्षित है। लंजार ने अनिल कुमार के प्रस्ताव को उनकी व्यक्तिगत राय करार दिया और इसे अव्यावहारिक बताया।
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मजाकिया लेकिन तीखे अंदाज में गृह मंत्री ने कहा कि आज मेरे दोस्त थोड़े जज्बाती हो गए हैं उन्होंने तर्क दिया कि पूर्ण प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक नहीं है क्योंकि इससे समाज के विभिन्न वर्ग प्रभावित होंगे और वर्तमान व्यवस्था ही पर्याप्त है।
सदन में मौजूद अन्य मुस्लिम विधायकों ने भी इस प्रस्ताव के खिलाफ अपनी राय रखी। लंबी बहस और सरकार के कड़े रुख के बाद, जब इस प्रस्ताव पर मतदान कराया गया तो बहुमत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। यह घटना अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है जहां लोग एक हिंदू विधायक द्वारा धार्मिक शुचिता की मांग और सरकार द्वारा ‘व्यावहारिकता’ के नाम पर उसके विरोध को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।