
इमरान के मुरीदों पर शाहबाज सरकार का कहर
लाहौर: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के नेताओं के कार्यालयों और आवासों पर छापेमारी करके इसके 12 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। पार्टी की ओर से राजनीतिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने की घोषणा के बाद यह कार्रवाई की गई। यह जानकारी सोमवार को मिली।
इस घटना बाबत पंजाब के वरिष्ठ PTI नेता शौकत बसरा ने कहा कि पंजाब पुलिस ने रावलपिंडी और प्रांत के अन्य जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलनों के आयोजन की व्यवस्था करने में जुटे 12 से अधिक पीटीआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। बसरा ने कहा, ‘‘पीटीआई सांसदों के घरों की पवित्रता का उल्लंघन उन लोगों द्वारा किया गया है जिन्होंने उन पर धावा बोला और तोड़फोड़ की। फासीवादी शासन के पदाधिकारी यह कहकर अपनी कार्रवाई को उचित ठहराते हैं कि वे सेना के आदेश पर ऐसा कर रहे हैं।”
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बसरा ने यह भी कहा कि मुर्री जिला महासचिव सफदर जमान सत्ती सहित 12 से अधिक पीटीआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। बसरा और पीटीआई की पंजाब में प्रमुख संगठनकर्ता आलिया हमजा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा किए हैं जिनमें पुलिस की मनमानी साफ दिखाई दे रही है। हमजा ने कहा कि पंजाब सरकार सिर्फ अर्थव्यवस्था में वृद्धि के अपने फर्जी और झूठे आंकड़ों को प्रचारित करने के लिए बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाने में व्यस्त है।
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उन्होंने यह भी कहा कि सेना समर्थित ‘जनादेश चोरों’ ने जनता पर आतंक का राज कायम कर दिया है। पीटीआई प्रवक्ता शेख वक्कास अकरम ने कहा, ‘‘कठपुतली शासन ने व्यवस्थित रूप से कानून के शासन को रौंद दिया है, संवैधानिक सर्वोच्चता को खत्म कर दिया है, न्यायपालिका को पंगु बना दिया है, अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है और सत्ता पर अपनी निरंकुश पकड़ सुनिश्चित करने के लिए आतंक का राज कायम किया है।”
जानकारी दें कि, बीते 20 फरवरी को पाकिस्तान के एक उच्च न्यायालय ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के 120 से अधिक गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की जमानत बृहस्पतिवार को मंजूर करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था। वह PTI के सैकड़ों समर्थकों में शामिल थे, जिन्हें पिछले साल नवंबर में पार्टी द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस्लामाबाद हाई कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने मामले की सुनवाई की और प्रत्येक को 20,000 रुपये की जमानत राशि का भुगतान करने पर जमानत दे दी थी।
(एजेंसी इनपुट के साथ)






