बांग्लादेश के रास्ते भारत में ड्रग्स तस्करी की साजिश (सोर्स- सोशल मीडिया)
मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को भारत के खिलाफ अपने हाईब्रिड युद्ध का प्रमुख केंद्र बना लिया है। अब वहां पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की सक्रियता काफी बढ़ गई है। आईएसआई, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए बांग्लादेश में मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों का संचालन कर रही है।
इससे भारत की पूर्वी सीमा की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। यह खतरा इसलिए भी अधिक है क्योंकि भारत-बांग्लादेश की सीमा अब भी काफी हद तक खुली और असुरक्षित है। पाकिस्तान ने पिछले वर्ष बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उथल-पुथल का लाभ उठाकर वहां आतंक और अस्थिरता फैलाने के नए केंद्र स्थापित किए हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य भारत में अस्थिरता पैदा करना और उसके भीतर आतंरिक सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ाना है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में जब बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल हुई, शेख हसीना सरकार गिरी और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, तब पाकिस्तान ने मौके का फायदा उठाया। उसने भारत के खिलाफ साजिशें तेज कीं और जिहादी संगठनों को वित्तीय मदद बढ़ाई। जनरल जिया-उल-हक के समय से ही आईएसआई और दाऊद की डी-कंपनी का गठजोड़ मादक पदार्थों की कमाई को आतंक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करता आ रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अब दाऊद का कराची स्थित सिंडिकेट अफगान हेरोइन, मेथामफेटामाइन और सिंथेटिक ड्रग्स को बांग्लादेश के बंदरगाहों के माध्यम से भेजता है। ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि भारतीय एजेंसियों ने पहले से मौजूद तस्करी के रास्तों पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है। अक्टूबर 2025 में चटगांव बंदरगाह पर 25 टन मादक पदार्थ-ग्रेड अफीम के बीज बरामद हुए, जो एक पाकिस्तानी पशु आहार की खेप में छिपाए गए थे। जांच में सामने आया कि यह खेप भारत में नार्को टेरर फैलाने की साजिश का हिस्सा थी, लेकिन समय रहते इसका पर्दाफाश हो गया।
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यूनुस सरकार की नीतियों ने भी पाकिस्तान को मदद दी। सितंबर 2024 में पाकिस्तानी माल पर अनिवार्य जांच की छूट और दिसंबर 2024 में पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सुरक्षा मंजूरी में ढील दी गई। इससे ड्रग्स, हथियार और संदिग्ध लोग आसानी से बांग्लादेश पहुंचने लगे। कई रिपोर्टों से पता चला है कि डी-कंपनी ने चटगांव और कॉक्स बाजार में अपने ठिकाने बना लिए हैं। इस धन का बड़ा हिस्सा आईएसआई तक पहुंच रहा है, जिससे भारत की पूर्वी सीमा पर खतरा और बढ़ गया है।