भारत को आयरन डोम टेक्नोलॉजी दे सकता है इजरायल (सोर्स- सोशल मीडिया)
PM Modi Israel Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित इजरायल दौरे के दौरान एक अहम रक्षा समझौते पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार भारत को इजरायल की प्रसिद्ध आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तकनीक मिल सकती है। यह डील सिर्फ खरीद तक सीमित न रहकर ‘मेक इन इंडिया’ मॉडल के तहत तकनीक हस्तांतरण और भारत में निर्माण पर आधारित हो सकती है।
आयरन डोम दुनिया की सबसे उन्नत शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस प्रणालियों में से एक मानी जाती है।
मुंबई में इजरायल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने संकेत दिया है कि यह सौदा केवल खरीद-बिक्री का नहीं होगा। योजना है कि:
यह कदम भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को मजबूत करेगा और घरेलू रक्षा उद्योग को नई गति देगा।
भारत और इजरायल के बीच मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर पहले से गहरा सहयोग है। यदि आयरन डोम तकनीक भारत को मिलती है, तो यह साझेदारी और मजबूत होगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक शहरों को ड्रोन हमलों से बेहतर सुरक्षा मिल सकती है।
रक्षा संकेत बताते हैं कि भारत रूस के S-400 और इजरायल के आयरन डोम को मिलाकर एक मल्टी-लेयर एयर डिफेंस शील्ड तैयार करना चाहता है।
भारत ने 2018 में रूस के साथ लगभग 5 अरब डॉलर की S-400 डील की थी। यह सिस्टम 400 किलोमीटर तक की रेंज में:
जहां S-400 लंबी दूरी और ऊंचाई वाले खतरों से सुरक्षा देता है, वहीं आयरन डोम कम और मध्यम दूरी के रॉकेट, ड्रोन और स्वॉर्म हमलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है।
यदि दोनों सिस्टम एकीकृत नेटवर्क में जुड़ते हैं, तो:
इस तरह ऊपर से नीचे तक एक व्यापक सुरक्षा कवच तैयार हो सकता है।
हाल के ऑपरेशन सिंदूर ने यह संकेत दिया कि केवल लंबी दूरी के सिस्टम पर्याप्त नहीं हैं। ड्रोन स्वॉर्म और कम दूरी के हमलों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की आवश्यकता है और आयरन डोम इस भूमिका में उपयुक्त माना जा रहा है।
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यदि आयरन डोम तकनीक ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में आती है, तो यह न सिर्फ देश की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी नई ऊंचाई देगी।
स्पष्ट है कि भारत अब बहु-स्तरीय एयर डिफेंस शील्ड बनाकर हर स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है, और S-400 तथा आयरन डोम का संयोजन उसी व्यापक दृष्टि का अहम हिस्सा हो सकता है।