पाकिस्तान में 8 फरवरी को ‘जेल भरो’ आंदोलन… चुनाव धांधली के खिलाफ विपक्षी पार्टियां भरेंगी हुंकार
Opposition Protest Feb 8: पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने 2024 के चुनाव में हुई धांधली के विरोध में 8 फरवरी को 'जेल भरो आंदोलन' का आह्वान किया है। 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का विरोध कर रहे हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
पाकिस्तानमें 8 फरवरी को 'जेल भरो' आंदोलन (सोर्स-सोशल मीडिया)
Pakistan Opposition Parties Protest: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और पाक फौज के लिए आने वाली 8 फरवरी की तारीख बड़ी चुनौती साबित होने वाली है। पाकिस्तान के विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के तहत तहरीक तहफुज आईन-ए-पाकिस्तान (TTAP) और इमरान खान की पार्टी PTI ने पूरे देश में हड़ताल और ‘जेल भरो आंदोलन’ की घोषणा की है। विपक्षी गठबंधन का आरोप है कि 2024 के चुनाव में जनता के जनादेश की हत्या की गई थी, जिसके विरोध में अब वे सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
8 फरवरी को ‘काला दिवस’
विपक्षी पार्टियों ने 8 फरवरी को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला लिया है क्योंकि इसी तारीख को 2024 में आम चुनाव हुए थे। TTAP के अध्यक्ष महमूद खान अचकजई ने स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन का यह आह्वान किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने जनता से उस दिन सब कुछ बंद रखने का आग्रह किया है और संकेत दिया है कि विपक्षी नेता खुद अपनी गिरफ्तारी देकर ‘जेल भरो तारीख’ की शुरुआत करेंगे।
रावलपिंडी में रैली और पुलिस टकराव
एक तरफ जहां PTI और TTAP हड़ताल की तैयारी में हैं, वहीं जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने रावलपिंडी में एक बड़ी सार्वजनिक सभा करने का निर्णय लिया है। हालांकि, रावलपिंडी प्रशासन ने जिले में धारा 144 लागू कर रखी है, जिसके तहत किसी भी सार्वजनिक समारोह की अनुमति नहीं है। ऐसे में अगर JUI-F अपनी रैली करती है, तो स्थानीय पुलिस के साथ उनका सीधा टकराव होना तय माना जा रहा है।
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‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर सरकार की आलोचना
विपक्षी दलों ने न केवल घरेलू मुद्दों बल्कि सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने संसद और जनता को विश्वास में लिए बिना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के शहबाज सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है। विपक्ष का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते पर बिना किसी चर्चा के आगे बढ़ना देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
विपक्षी गठबंधन की मजबूत एकजुटता
इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान की कई बड़ी हस्तियां एक साथ आई हैं। हालिया बैठक में PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान, पूर्व गवर्नर जुबैर उमर और असद कैसर जैसे नेताओं ने भाग लिया। इन नेताओं का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन केवल शुरुआत है और इसके बाद सरकार पर दबाव बनाने के लिए और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।
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सरकार और फौज की चिंता
विपक्ष के इस बड़े आंदोलन की घोषणा के बाद शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना के बीच हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ देश अपने ही पाले हुए आतंकवाद से जूझ रहा है और दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता ने सरकार की परेशानी और बढ़ा दी है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखना और विपक्षी नेताओं को एकजुट होने से रोकना होगा।
