UGC मामले में बैकफुट पर सरकार! कहा- दुरुपयोग नहीं होने देंगे, भ्रम फैलाया जा रहा; जल्द जारी करेगी फैक्ट

UGC Guidelines: जातिगत भेदभाव रोकने के लिए लाए गए UGC के नए नियमों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच खबर है कि सरकार जल्द ही इसे लेकर अपनी स्थिति साफ कर सकती है।
Government on UGC matter Says it will not allow misuse, claims misinformation is being spread
सांकेतिक तस्वीर (Image- Socila Media)
Published on
Updated on

UGC Rules Controversy: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए जारी किए गए नए नियमों के खिलाफ विरोध बढ़ता जा रहा है। विशेषकर सवर्ण जाति के लोग इन नियमों का जमकर विरोध कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर भी इसका विरोध उभरकर सामने आ रहा है, और अब तक कई नेताओं ने इस मुद्दे पर इस्तीफा दे दिया है। देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार भी एक्टिव हो गई है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि UGC के इन नियमों को लेकर भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, और सरकार जल्द ही आश्वासन दे सकती है कि इनका दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट करने की तैयारी

NDTV ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार जल्द ही इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती है। सरकार की कोशिश है कि सभी तथ्यों को सामने रखा जाए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न फैले। संसद के बजट सत्र से पहले विपक्ष इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है, इसलिए सरकार भी जल्द ही अपनी प्रतिक्रिया दे सकती है, ताकि सभी पक्ष सामने आ सकें।

क्या है पूरा मामला?

UGC ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना है। इन नियमों को सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लागू कर दिया गया है। नियमों के तहत जातिगत भेदभाव की परिभाषा को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को शामिल किया गया है। यही वह बिंदु है जिस पर सबसे ज्यादा विवाद हो रहा है। सवर्ण समाज का आरोप है कि इन नियमों के तहत UGC ने सवर्ण जाति के छात्रों को अपराधी के रूप में पेश किया है।

UGC के नए नियम क्या हैं?

UGC के नए नियमों का नाम 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026' है। इन नियमों के तहत हर शिक्षण संस्थान को इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर (EOC) बनाना होगा। EOC के तहत एक इक्विटी कमेटी का गठन होगा, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के प्रमुख करेंगे। यह कमेटी हर साल एक रिपोर्ट UGC को सौंपेगी, और UGC भी इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाएगा।

अगर किसी संस्थान में जातिगत भेदभाव होता है, तो छात्र अपनी शिकायत इक्विटी कमेटी में दर्ज कर सकते हैं। इस शिकायत पर कमेटी 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करेगी और 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट संस्थान के प्रमुख को सौंपेगी। संस्थान के प्रमुख को इस रिपोर्ट के आधार पर 7 दिन के भीतर कार्रवाई करनी होगी। अगर कोई छात्र संस्थान के प्रमुख के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह 30 दिन के भीतर अपील कर सकता है। इसके अलावा, इन नियमों के उल्लंघन पर संस्थान की UGC मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

झूठी शिकायतों पर विवाद

फरवरी 2025 में जब UGC ने इन नियमों का ड्राफ्ट जारी किया था, तो उसमें OBC छात्रों को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन अब अंतिम नियमों में OBC को भी शामिल कर लिया गया है। एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि इन नए नियमों में झूठी शिकायत करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई का प्रावधान नहीं रखा गया है, जबकि ड्राफ्ट में ऐसा प्रावधान था जिसमें झूठी शिकायत करने वाले पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव था। इस बदलाव को लेकर भी विरोध हो रहा है, खासकर सवर्ण समाज का कहना है कि इससे उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com