अब पड़ोसी देश गूंजेगा ‘जय श्री राम’; पाक में खुला भगवान राम के बेटे का मंदिर; लाहौर किले में हुआ जीर्णोद्धार
Pakistan के लाहौर किले में स्थित ऐतिहासिक लौह मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद इसे जनता के लिए खोल दिया गया है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम के पुत्र लव के नाम पर ही लाहौर शहर का नाम पड़ा।
- Written By: अमन उपाध्याय
पाक में खुला भगवान राम के बेटे का मंदिर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Lord Ram Son Luv Temple Pakistan: सरहद पार पाकिस्तान से हिंदू समाज और भगवान राम के भक्तों के लिए एक बड़ी खबर आई है। पंजाब प्रांत के लाहौर किले में स्थित ऐतिहासिक लौह मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार कार्य पूरा कर लिया गया है और अब इसे आधिकारिक तौर पर पर्यटकों और भक्तों के लिए खोल दिया गया है।
यह मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भगवान राम के पुत्र लव को समर्पित है। स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, ‘लव’ ने ही इस क्षेत्र की स्थापना की थी और उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम ‘लाहौर’ पड़ा।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
‘वाल्ड सिटी लाहौर अथॉरिटी’ (WCLA) की प्रवक्ता तानिया कुरैशी ने जानकारी दी कि इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य लाहौर किले की समृद्ध, विविध और साझा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। उन्होंने बताया कि यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण तक सीमित है, बल्कि इसके माध्यम से क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक महत्व को भी पुनर्जीवित किया जा रहा है।
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मंदिर के पुनरुद्धार के साथ-साथ प्रशासन ने अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया है। इनमें सिख काल का प्रसिद्ध ऐतिहासिक हम्माम शामिल है जिसे उसकी मूल संरचना और स्वरूप में पुनः विकसित किया गया है।
महाराजा रणजीत सिंह के अठदारा का भी जीर्णोद्धार
इसके अलावा, महाराजा रणजीत सिंह के अठदारा पैविलियन का भी जीर्णोद्धार किया गया है ताकि उसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य विशेषताओं को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने बताया कि इस कार्य में आधुनिक और व्यापक तकनीकों का उपयोग किया गया है ताकि इन प्राचीन संरचनाओं की मूल पहचान बनी रहे।
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सिख साम्राज्य के इतिहास पर विशेष फोकस
किले के ऐतिहासिक महत्व को दुनिया के सामने लाने के लिए अमेरिका स्थित सिख शोधकर्ता डॉ. तरुणजीत सिंह बुटालिया को एक टूर गाइडबुक लिखने का काम सौंपा गया है। ‘सिख साम्राज्य के दौरान लाहौर किला’ शीर्षक वाली इस पुस्तक में किले के उन 100 स्मारकों का विवरण होगा जो 1799-1849 के दौरान मौजूद थे। डॉ. बुटालिया के अनुसार, यह किला सिख मानस में गहराई से समाया हुआ है और लंबे समय तक सत्ता का केंद्र रहा है।
