भीख मांगने की रेस में पाकिस्तान बना ‘सुपरस्टार’, IMF के सामने फिर फैलाया झोली; 1.2 अरब डॉलर की किश्त मंजूर
Pakistan IMF Deal: आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बड़ी मदद हासिल की है। आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए 1.2 अरब डॉलर की राशि को प्रारंभिक मंजूरी दे दी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
शहबाज शरीफ, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Economic Crisis IMF Deal: कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सामने झोली फैलाने में कामयाब रहा है। निर्लज्जता और आर्थिक बदहाली के बीच पाकिस्तान ने गिड़गिड़ा कर आईएमएफ से 1.2 अरब डॉलर की सहायता के लिए प्रारंभिक समझौता कर लिया है। सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों ने पाकिस्तान की इस बार-बार कर्ज मांगने की प्रवृत्ति को लेकर उसे ‘सुपरस्टार भिखारी’ तक करार दिया है।
कैसे और किन शर्तों पर मिली मदद?
आईएमएफ ने शनिवार को घोषणा की कि उसने पाकिस्तान के साथ दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत समझौता किया है। इसमें विस्तारित कोष सुविधा (EFF) की तीसरी समीक्षा और जलवायु चुनौतियों के लिए शुरू की गई रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) की दूसरी समीक्षा को सफलतापूर्वक पूरा माना गया है। गौरतलब है कि आईएमएफ का प्रतिनिधिमंडल 25 फरवरी से 2 मार्च तक कराची और इस्लामाबाद में था लेकिन तब कोई सहमति नहीं बन पाई थी बाद में ऑनलाइन बातचीत के जरिए इस डील को अंतिम रूप दिया गया।
किसे कितना मिलेगा?
आईएमएफ की मिशन प्रमुख इवा पेट्रोवा के अनुसार, बोर्ड की अंतिम मंजूरी के बाद पाकिस्तान को दो हिस्सों में पैसा मिलेगा:
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- EFF के तहत: लगभग 1 अरब डॉलर।
- RSF के तहत: करीब 21 करोड़ डॉलर (210 मिलियन डॉलर)।
पाकिस्तान साल 2024 में आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के विशाल EFF कार्यक्रम का हिस्सा बना था जिसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को स्थिर करना, बाजार में विश्वास बहाल करना और ऊर्जा क्षेत्र की खामियों को दूर करना है। पिछले साल भी पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन के लिए 1.4 अरब डॉलर की मदद मिली थी।
अर्थव्यवस्था की बदहाली और सवाल
भले ही शहबाज शरीफ सरकार इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत मान रही हो लेकिन जानकारों का मानना है कि कर्ज पर कर्ज लेना पाकिस्तान के लिए दीर्घकालिक समाधान नहीं है। सवाल यही बना हुआ है कि आखिर कब तक पाकिस्तान सऊदी अरब, यूएई और आईएमएफ जैसी संस्थाओं से भीख मांगकर अपना गुजारा करेगा? वर्तमान कार्यक्रम का लक्ष्य राजकोषीय सुधारों को जारी रखना है लेकिन पाकिस्तान की जनता के लिए यह बढ़ती महंगाई और कठिन शर्तों का संकेत भी है।
