जलवायु परिवर्तन के खतरे दरवाजे पर मौसम के बिगड़े मिजाज से खेती प्रभावित दिन विशेष

जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में असामान्य बदलाव, खेती पर गंभीर प्रभाव और किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं।
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Bhandara News: प्रकृति का मिजाज तेजी से बदल रहा है और इसका असर अब सीधे जनजीवन और खेती पर दिखाई देने लगा है. कभी गर्मियों में बारिश, तो कभी सर्दियों में पसीना पिछले कुछ वर्षों से ऐसे असामान्य मौसम का अनुभव हो रहा है. इस बदलते मौसम ने खासकर कृषि क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. 23 मार्च को दुनियाभर में विश्व मौसम दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करना और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के उपायों पर जोर देना है.

जिले में बेमौसम बारिश का बड़ा असर पिछले वर्ष जून से सितंबर 2025 के बीच जिले को प्राकृतिक आपदाओं का भारी सामना करना पड़ा. बेमौसम बारिश, अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण हजारों किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं. करीब 27,302 किसानों की 9,043.3 हेक्टेयर खेती प्रभावित हुई. वर्तमान में भी पिछले सप्ताह से मौसम में बदलाव देखा जा रहा है और कुछ क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई है.

मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है, लेकिन प्रकृति के अनिश्चित व्यवहार से नुकसान टालना मुश्किल हो रहा है. जलवायु परिवर्तन के कारण और प्रभाव विकास कार्यों के नाम पर जिले में बड़े पैमाने पर सीमेंट सड़कों का जाल बिछाया गया है, जिससे तापमान में वृद्धि महसूस की जा रही है. मार्च में ही पारा 37 से 38 डिग्री तक पहुंच गया है.

सीमेंट सड़कें डामर की तुलना में अधिक समय तक गर्म रहती हैं, जिससे गर्मी का असर और बढ़ जाता है. वृक्षों की कटाई पर नाराजगी हाईवे निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई, लेकिन इसके बदले नए पौधे लगाने का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है. पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ का संदेश देने वाली व्यवस्था पर ही लापरवाही के आरोप लग रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी है. किसानों और छोटे व्यवसायों पर असर मौसम के असंतुलन के कारण रबी फसलें संकट में हैं.

वहीं, मौसम आधारित छोटे व्यवसाय भी प्रभावित हुए हैं. किसानों और व्यापारियों का आर्थिक संतुलन बिगड़ गया है. क्या है जलवायु परिवर्तन किसी क्षेत्र के लंबे समय के औसत मौसम जैसे तापमान, वर्षा, हवा और ठंड में होने वाला तेज बदलाव ही जलवायु परिवर्तन कहलाता है.

प्रदूषण, पेड़ों की कटाई और पर्यावरण असंतुलन के कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है. ठोस कदम उठाना जरूरी ग्रीन हेरिटेज संस्था के अध्यक्ष सईद शेख ने कहा कि मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है. यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मानव और प्रकृति दोनों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.

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