पाकिस्तान का POK बना हमास के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह (सोर्स-सोशल मीडिया)
Hamas Sanctuary In Pakistan Report: मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट की हालिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान के आतंकी संबंधों पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अब हमास के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह और वैचारिक आधार बनता जा रहा है। विशेष रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हमास की गतिविधियां और लॉजिस्टिक समर्थन काफी तेजी से बढ़ा है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्र में पश्चिमी देशों के हितों के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, जब वैश्विक समुदाय गाजा में हमास के सैन्य ढांचे को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उसी समय पाकिस्तान हमास के पुनर्गठन के लिए अगला उपजाऊ क्षेत्र बनता जा रहा है, जो एक गंभीर जोखिम है। यह स्थिति पश्चिमी देशों और क्षेत्रीय शांति के लिए भविष्य में कई बड़ी चुनौतियां पैदा कर सकती है।
मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि PoK में हमास का आधार बनाना एक वास्तविक खतरा है। हमास का वैचारिक और लॉजिस्टिक ढांचा वहां धीरे-धीरे अपनी जड़ें काफी गहराई तक जमाता जा रहा है। पाकिस्तान अपनी धरती पर इन प्रतिनिधियों को बिना किसी रोक-टोक के सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने देता है।
अमेरिकी नेतृत्व में गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का उद्देश्य गाजा में वैध शासन और स्थायी शांति सुनिश्चित करना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संगठन के अध्यक्ष के रूप में शहबाज शरीफ को सहयोग के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन पाकिस्तान की आंतरिक गतिविधियों को देखते हुए उसकी इस प्रक्रिया में भागीदारी पर अब सवाल उठ रहे हैं।
अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमले के बाद हमास नेता नाजी जहीर की राजनीतिक गतिविधियां बहुत बढ़ गई हैं। जहीर को पाकिस्तान में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाकर सम्मानित किया जा रहा है। वह हमास की आतंकी गतिविधियों के लिए जनता का समर्थन और वैधता जुटाने में काफी सक्रिय है।
चिंता की बात यह है कि जहीर अक्सर लश्कर और जैश जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ देखा जाता है। इन संगठनों के नेताओं के साथ मंच साझा करना हमास के कट्टरपंथी एजेंडे को और अधिक मजबूती देता है। यह गठबंधन स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क किस तरह एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं।
तेहरान स्थित हमास प्रतिनिधि खालिद कद्दूमी भी पाकिस्तान के विभिन्न संस्थानों में रैलियों का आयोजन कर रहे हैं। कद्दूमी की मौजूदगी यह दर्शाती है कि इस्लामाबाद हमास की गतिविधियों को अपना मौन समर्थन प्रदान कर रहा है। यह वाशिंगटन के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इससे पाकिस्तान की आतंक विरोधी प्रतिबद्धता शून्य दिखती है।
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कश्मीर एकजुटता दिवस के अवसर पर 5 फरवरी 2025 को PoK में कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित हुए थे। इन आयोजनों में पाकिस्तानी सेना, सरकार और जिहादी कमांडरों के साथ हमास नेताओं ने भी हिस्सा लिया था। यह घटनाक्रम दिखाता है कि पाकिस्तान की पूरी व्यवस्था में हमास का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
हमास के प्रतिनिधियों की कई पाकिस्तानी राजदूतों के साथ हुई मुलाकातें उनके आधिकारिक प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। यह कूटनीतिक समर्थन हमास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिशों को भारी नुकसान पहुंचाता है। क्या अमेरिका को अभी भी पाकिस्तान को गैर-नाटो सहयोगी समझना चाहिए, यह अब एक बड़ा प्रश्न है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष यह बताते हैं कि पाकिस्तान अब उग्रवाद के पुनर्गठन के लिए एक सुरक्षित केंद्र बन चुका है। अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो यह क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण बनेगा। पाकिस्तान का यह दोहरा रवैया शांति बहाली के वैश्विक प्रयासों के लिए एक गंभीर बाधा बन गया है।