Hamid Mir का बड़ा आरोप: पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान की मदद कर रहे हैं खाड़ी देश
Middle East Involvement: वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने दावा किया है कि खाड़ी के कुछ देश पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए तालिबान का साथ दे रहे हैं। युद्ध के बीच इन नए आरोपों ने खलबली मचा दी है।
- Written By: प्रिया सिंह
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Hamid Mir Allegations Middle East Supporting Taliban: सरहद पर जारी भीषण जंग के बीच अब पाकिस्तान के अंदर से ही चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं जिससे विवाद और गहरा गया है। मशहूर पत्रकार हामिद मीर ने आरोप लगाया है कि मिडिल ईस्ट के कुछ देश तालिबान को पाकिस्तान पर हमला करने के लिए उकसा रहे हैं। मध्य पूर्व के देश तालिबान का समर्थन कर रहे हैं के इस दावे ने अब इस पूरी लड़ाई को एक नया और बहुत ही खतरनाक मोड़ दे दिया है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की भूमिका पर सवाल उठने से अब कूटनीतिक गलियारों में काफी हलचल मच गई है।
हामिद मीर का गंभीर आरोप
जियो न्यूज पर एक चर्चा के दौरान हामिद मीर ने कहा कि कम से कम एक या दो खाड़ी देश इस वक्त तालिबान की पीठ थपथपा रहे हैं। उनका मानना है कि ये देश पाकिस्तान को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश के तहत आतंकवादियों को हमले करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पत्रकार ने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय ताकतें पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर एक खतरनाक ‘डबल गेम’ खेल रही हैं।
कतर और UAE पर टिकी नजरें
हामिद मीर ने सीधे तौर पर नाम नहीं लिए, लेकिन जानकारों का मानना है कि उनका निशाना कतर और UAE की तरफ ही है। कतर में वर्षों से तालिबान का राजनीतिक दफ्तर रहा है और वहां की सरकार का तालिबान के साथ बहुत पुराना और मजबूत रिश्ता रहा है। वहीं पिछले कुछ समय से संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान के रिश्तों में भी कड़वाहट आई है जिससे यह शक और ज्यादा गहरा हो जाता है।
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सीजफायर और तुर्की की भूमिका
सीमा पर जारी हिंसा को रोकने के लिए अब तुर्की एक बार फिर से सक्रिय हो गया है और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। हामिद मीर का कहना है कि पिछली बार कतर के अधिकारी पाकिस्तानी अफसरों के व्यवहार से नाराज होकर बातचीत बीच में ही छोड़ गए थे। अब युद्धविराम के लिए किसी ऐसी बड़ी ताकत की जरूरत है जो इन वादों की पूरी गारंटी ले सके ताकि कोई मुकर न सके।
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पाकिस्तान की हवाई ताकत का असर
तालिबान के पास कोई अपनी हवाई सेना नहीं है और इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पाकिस्तान उनके ठिकानों पर लगातार भारी बमबारी कर रहा है। पाकिस्तानी सेना अब केवल संदिग्ध कैंपों को ही नहीं बल्कि तालिबान के पूरे मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर उसे तबाह करने का विकल्प चुन रही है। सीमा पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों तरफ से होने वाले हमलों में अब तक काफी नुकसान हुआ है।
