ईरान पर ग्राउंड इनवेजन की तैयारी में अमेरिका? रूस का बड़ा दावा- शांति वार्ता सिर्फ एक कवर
US Iran Ground Invasion: रूस ने दावा किया है कि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता महज एक दिखावा है। मिडिल ईस्ट में 50,000 अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों का भारी जमावड़ा किसी बड़े जमीनी हमले का संकेत दे रहा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
मोजतबा खामेनेई, पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Iran Ground Invasion In Iran: मिडिल ईस्ट में चल रही कूटनीतिक हलचलों के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रूस की सुरक्षा परिषद ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता असल में एक सोची-समझी रणनीतिक चाल या ‘कवर’ हो सकती है। रूस के अनुसार, इस दिखावे की बातचीत के पीछे का असली मकसद ईरान के खिलाफ एक बड़े ग्राउंड इनवेजन (जमीनी हमले) की तैयारी के लिए समय हासिल करना है।
भारी सैन्य जमावड़ा
रूस की रिपोर्टों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति इस समय अपने चरम पर है। वर्तमान में क्षेत्र में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए हैं। इस टुकड़ी में 11वीं एक्सपेडिशनरी कॉर्प्स के करीब 2,500 मरीन, 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 1,200 सैनिक और डेल्टा फोर्स जैसी एलीट यूनिट्स शामिल हैं। इसके अलावा, पिछले 48 घंटों में अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिकों को भी इस मोर्चे पर भेजा है।
जमीन के साथ-साथ आसमान और समुद्र में भी घेराबंदी सख्त कर दी गई है। विभिन्न एयरबेस पर 500 से अधिक विमान, जिनमें 250 टैक्टिकल फाइटर जेट्स शामिल हैं हमले के लिए तैयार खड़े हैं। समुद्र में 20 से अधिक अमेरिकी युद्धपोत तैनात हैं और यूएसएस जॉर्ज डब्ल्यू बुश एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तेजी से अरब सागर की ओर बढ़ रहा है।
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रणनीतिक चोक पॉइंट्स
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका जमीनी हमला करता है तो यह पारंपरिक युद्ध से काफी अलग होगा। आधुनिक रणनीति के तहत, अमेरिका ‘स्मार्ट वॉरफेयर’ पर ध्यान केंद्रित कर सकता है, जिसमें सीधे टकराव के बजाय सटीक हमले किए जाते हैं। इसका उद्देश्य ईरान के कमांड नेटवर्क को हैक करना प्रमुख रडार सिस्टम को बंद करना या बंदरगाहों की बिजली ठप करना हो सकता है।
ईरान के लिए खार्ग आइलैंड
जैसे रणनीतिक ठिकाने उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। रूस का दावा है कि अमेरिका इन ‘चोक पॉइंट्स’ पर हमला कर ईरान को बिना किसी बड़े युद्ध के घुटने टेकने पर मजबूर करने की योजना बना रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पिछला रिकॉर्ड भी इस शक को पुख्ता करता है जहां उन्होंने बातचीत के दौरान अचानक सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है।
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रूस की चिंता और वैश्विक प्रभाव
मॉस्को इस स्थिति को लेकर बेहद चिंतित है क्योंकि ईरान के साथ उसके मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। रूस को डर है कि यदि अमेरिका कोई सैन्य कदम उठाता है तो पूरा मिडिल ईस्ट एक भीषण युद्ध की चपेट में आ जाएगा जिससे वैश्विक तेल बाजार पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है। फिलहाल, दुनिया की नजरें इन सैन्य गतिविधियों पर टिकी हैं, क्योंकि अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह केवल दबाव की राजनीति है या किसी महायुद्ध की शुरुआत।
