इस्तांबुल में फिर आमने-सामने पाकिस्तान और अफगानिस्तान, क्या इस बार होगी सुलह या फिर बढ़ेगा तनाव?
Afghanistan Pakistan Peace Talks: तुर्की और कतर की मध्यस्थता में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तीसरे दौर की वार्ता इस्तांबुल में शुरू हुई है। दोनों देश आतंकवाद और सीमा तनाव कम करने पर चर्चा कर रहे।
- Written By: अमन उपाध्याय
इस्तांबुल में फिर आमने-सामने पाकिस्तान और अफगानिस्तान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Afghanistan Istanbul Meeting: पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौट आए हैं। तुर्की के इस्तांबुल में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता शुरू हो चुकी है। यह वार्ता दो दिनों तक चलेगी और इसे तुर्की व कतर की संयुक्त पहल पर आयोजित किया जा रहा है।
पाकिस्तान की ओर से इस डेलिगेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक कर रहे हैं। उनके साथ आईएसआई के महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मौजूद हैं। वहीं अफगानिस्तान की ओर से जीडीआई अब्दुल हक वासेक, उपगृहमंत्री रहमतुल्लाह नजीब, तालिबान प्रवक्ता सुहेल शाहीन और अनस हक्कानी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
पाकिस्तानी सेना का बयान
पाकिस्तानी सेना ने बयान जारी करते हुए कहा है कि उनका रुख अब भी वही है अफगानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी आतंकी गतिविधि के लिए नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
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गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच यह शांति प्रक्रिया अक्टूबर 2025 की शुरुआत में तब शुरू हुई थी जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान स्थित TTP के कैंपों पर हवाई हमले किए थे, जिसमें कई लोग मारे गए थे। इस हमले के बाद बढ़े तनाव को कम करने के लिए 19 अक्टूबर को दोहा (कतर) में पहली वार्ता हुई थी। उस दौरान दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने अस्थायी सीजफायर और संवाद जारी रखने पर सहमति जताई थी।
TTP के खिलाफ कार्रवाई
इसके बाद 25 से 28 अक्टूबर के बीच इस्तांबुल में दूसरी दौर की वार्ता हुई थी, लेकिन वह पूरी तरह विफल रही। उस समय दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास और असहमति मुख्य बाधा बना। पाकिस्तान ने अफगान तालिबान सरकार से TTP के खिलाफ कार्रवाई, कैंप खत्म करने और लिखित गारंटी की मांग की थी। हालांकि, अफगानिस्तान ने इन शर्तों को असंभव बताते हुए कहा कि उनके पास TTP पर पूरा नियंत्रण नहीं है। अफगान पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान तीसरे देशों के ड्रोन हमलों को लेकर भ्रम फैला रहा है।
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इसी आपसी अविश्वास के चलते दूसरी दौर की बातचीत नाकाम रही थी। अब तीसरे दौर की यह वार्ता इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि तुर्की और कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थ के रूप में सक्रिय हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर इस दौर में सीमा सुरक्षा और आतंकवाद पर कोई साझा फ्रेमवर्क तय हो जाता है, तो आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच संबंधों में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।
