नूर इनायत खान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Noor Inayat Khan Brave Female Spy: नूर इनायत खान की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। एक नाजुक और शांत स्वभाव की लड़की, जिसने अपने जीवन को देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया। वह अकेली महिला जासूस थीं, जिसने नाजी सेना की नींव हिला दी। लेकिन अंत में उसे सबसे बड़ा धोखा अपने ही लोगों से मिला और उसकी आखिरी चीख आज भी इतिहास में गूंजती है।
नूर इनायत खान का जीवन बहादुरी, दर्द और विश्वासघात से भरी कहानी है। वह एक छोटे और आदर्शवादी परिवार में पली-बढ़ीं। बचपन में बेहद नाजुक और शांत स्वभाव की नूर को शायद खुद भी नहीं पता था कि एक दिन वह दुनिया के सबसे खतरनाक तानाशाह हिटलर की सेना से लड़ेंगी। जब नाजियों ने यूरोप को रौंदना शुरू किया, तो नूर के भीतर बदला लेने की आग भड़क उठी और उन्होंने शांति का रास्ता छोड़कर जासूसी की दुनिया में कदम रखा।
नूर ने British Women’s Air Force (WAAF) में शामिल होकर ट्रेनिंग ली। बाद में उन्हें ब्रिटेन की स्पेशल ऑपरेशन्स एक्जिक्यूटिव (SOE) द्वारा फ्रांस में रेडियो ऑपरेटर बनाकर भेजा गया। 1943 में फ्रांस पहुंचते ही उन्होंने अपना कोड नेम ‘मेडलिन’ रखा। जब वह वहां पहुंचीं, तब तक पूरा नेटवर्क खत्म हो चुका था और सभी एजेंट मारे जा चुके थे। नूर ने अकेले पूरे पेरिस नेटवर्क को संभाला और नाजियों की नींद उड़ा दी।
नूर को कोई नाजी सैनिक पकड़ नहीं पाया, उन्हें धोखा दिया एक महिला ने रेनी गैरी ने, जो उनके साथी की बहन थी। कहा जाता है कि रेनी, नूर की खूबसूरती और शोहरत से जलती थी। उसने 1 लाख फ्रैंक (लगभग ₹10,000) के बदले नूर का पता नाजियों को बेच दिया।
नूर को पकड़ना आसान नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अकेले 6 नाजी सैनिकों से जबरदस्त मुकाबला किया। लेकिन संख्या ज्यादा होने के कारण उन्हें काबू कर लिया गया। नूर की सबसे बड़ी गलती यह थी कि वह अपने रेडियो कोड्स और संदेशों को नष्ट नहीं करती थीं, बल्कि नोटबुक में लिखकर रखती थीं। यही नोटबुक पूरे नेटवर्क के खुलासे की वजह बन गई।
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नूर पर गेस्टापो ने कई महीनों तक अमानवीय टॉर्चर किया। वह उनसे कोड और साथियों के नाम जानना चाहते थे, लेकिन नूर ने एक शब्द तक नहीं बोला। इसके बाद उन्हें डचाऊ कॉन्सन्ट्रेशन कैंप भेज दिया गया। 13 सितंबर 1944, सिर्फ 29 वर्ष की उम्र में, नूर को गोलियों से भून दिया गया। उनका आखिरी शब्द था “लिबर्टे” यानी “आजादी”।