ईरान की इजरायल को परमाणु हमले की चेतावनी, सत्ता परिवर्तन की कोशिशों पर भड़का तेहरान
Iran Israel Nuclear Crisis: ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर US और इजरायल सत्ता परिवर्तन की कोशिश करते हैं, तो वह इजरायल के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाएगा। युद्ध का तनाव अब चरम पर पहुंच गया है।
- Written By: प्रिया सिंह
ईरान की इजरायल को परमाणु हमले की चेतावनी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Middle East War Escalation News: मध्य पूर्व में जारी युद्ध बढ़ने की खबरों के बीच ईरान ने एक बहुत ही सख्त रुख अपनाया है। तेहरान का कहना है कि अगर उसकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश हुई तो वह खौफनाक कदम उठाएगा। ईरान में शासन परिवर्तन के प्रयास की खबरों के बाद अब परमाणु ठिकानों पर सीधे हमले का खतरा मंडराने लगा है। यह स्थिति न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
सत्ता परिवर्तन की कोशिश और तनाव
ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने साफ कर दिया है कि उनका देश अब किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा। अगर अमेरिका या इजरायल ने वहां की मौजूदा व्यवस्था को हटाने की कोई भी हिमाकत की तो अंजाम बुरा होगा। तेहरान ने खुली चेतावनी दी है कि वह इजरायल के परमाणु ठिकानों को अपना सीधा निशाना बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमेरिकी और इजरायली हमलों की रणनीति
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने इस सुलगती आग में और घी डालने का काम किया है। इन नेताओं का मानना है कि सैन्य कार्रवाई के जरिए ऐसे हालात पैदा किए जा सकते हैं जिससे वहां की जनता खुद विद्रोह कर दे। ईरान ने इन बयानों को अपने देश के निजी और आंतरिक मामलों में एक सीधा और बहुत ही खतरनाक हस्तक्षेप माना है।
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शासन की पकड़ कमजोर करने की योजना
अमेरिकी और इजरायली सेना की रणनीति अब केवल सैन्य ठिकानों तक ही सीमित नहीं रह गई है बल्कि वे व्यापक स्तर पर हमले कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार अब पुलिस स्टेशनों और अर्धसैनिक संगठनों के ठिकानों को भी बहुत ही सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। तेहरान में कई पुलिस चौकियों पर हुए हमलों ने वहां के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है और भारी दबाव बढ़ा दिया है।
प्रशासनिक नियंत्रण पर गहराता संकट
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन घातक हमलों का असल मकसद केवल सैन्य ताकत को कम करना नहीं बल्कि शासन के नियंत्रण को कमजोर करना है। मिडिल लेवल के कमांडरों और फील्ड यूनिट्स को निशाना बनाकर अमेरिका वहां के प्रशासनिक और सरकारी तंत्र को पूरी तरह से पंगु बनाना चाहता है। ऐसा करने से ईरान की सरकार के लिए देश के भीतर होने वाले किसी भी जन-विरोध को रोकना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
डूम्सडे मिसाइल और विश्व युद्ध का डर
इसी बीच अमेरिका ने कैलिफोर्निया के पास अपनी ‘डूम्सडे’ मिसाइल का भी परीक्षण किया है जो हिरोशिमा से भी ज्यादा तबाही मचाने की ताकत रखती है। इस परमाणु परीक्षण और ईरान-इजरायल युद्ध की खबरों ने पूरी दुनिया को एक तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब दोनों पक्षों से हथियार डालकर बातचीत की मेज पर आने और शांति की राह चुनने की विनती कर रहा है।
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युद्ध की मार और मानवीय क्षति
युद्ध की विभीषिका के कारण आम लोगों का जीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है और हवाई सफर पूरी तरह से ठप पड़ता दिख रहा है। केवल भारत में ही अब तक करीब 180 फ्लाइट्स को सुरक्षा कारणों से कैंसिल कर दिया गया है जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी हो रही है। अमेरिकी हमले में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने और उसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत ने इस संघर्ष के दर्द को और गहरा कर दिया है।
