नवभारत संपादकीय: क्या अमेरिका-इजराइल रिश्तों में आई दरार? खुफिया गतिविधियों पर बढ़ी चिंता
US Israel Relations: अमेरिका और इजराइल के मजबूत संबंधों के बीच खुफिया गतिविधियों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सुरक्षा और जासूसी संबंधी चिंताओं ने रणनीतिक रिश्तों पर बहस छेड़ दी है।
- Written By: अंकिता पटेल
खुफिया गतिविधियां, पेंटागन, नेतन्याहू, ट्रंप,(सोर्स: सोशल मीडिया)
US Israel Intelligence Tensions: इजराइल के निर्माण में अमेरिका का योगदान रहा है। द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया के विभिन्न देशों से आए यहूदियों को वहां बसाया गया। अरब देशों के बीच इजराइल का नक्शा किसी कटार जैसा नजर आने लगा। रेतीली बंजर जमीन को इजराइलियों ने अपने परिश्रम व तकनीक से उपजाऊ बना दिया और कम पानी में फसलें उगाने लगे। सैन्य शक्ति में भी इजराइल लगातार मजबूत होता चला गया। अमेरिका हमेशा से इजराइल का संरक्षक और प्रबल समर्थक रहा है।
इजराइल ने ईरान से युद्ध छेड़ा तो अमेरिका मदद के लिए कूद पड़ा। इतना सब कुछ होने पर भी अब अमेरिका व इजराइल के रिश्ते में दरार पड़ने लगी है। अमेरिकी रक्षा संस्थान पेंटागन ने इजराइल की खुफिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। नेतन्याहू अपने दोस्त ट्रंप की जासूसी करवा रहे हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने हाल ही में इजराइल से जुड़े काउंटर इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाकर ‘क्रिटिकल’ कर दिया है। यह इस बात का संकेत है कि इजराइल कभी भी अमेरिकी अधिकारियों को अपनी जासूसी का निशाना बना सकते हैं। इसे देखते हुए इजराइल जाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को अक्सर सर्चर फोन, अस्थायी कंम्यूटर व स्पेशल कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
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गाजा युद्ध के बीच इजराइल पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
अमेरिकी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वह संवेदनशील विषयों पर होटल के कमरों या अन्य असुरक्षित स्थानों पर चर्चा न करें। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भड़क उठे। अमेरिका में किए गए गैलप सर्वे के अनुसार फिलिस्तीन सहानुभूति अर्जित करने के मामले में इजराइल से आगे निकल गया है। 41 प्रतिशत अमेरिकी लोगों की सहानुभूति फिलिस्तीन के साथ है। जबकि इजराइल के पक्ष में सिर्फ 36 प्रतिशत लोग हैं।
अमेरिका व यूरोप की पुरानी पीढ़ी यहूदियों के ऐतिहासिक उत्पीड़न (हिटलर द्वारा किए गए उनके नरसंहार) के प्रति सहानुभूति से देखती है। जर्मनी में 60 लाख यहूदियों को मारा गया था। इसके विपरीत आज के युवा इजराइल के आक्रामक रवैये और गाजा में मानवाधिकारों को कुचले जाने से नाराज हैं।
गाजा संघर्ष से इजराइल की वैश्विक छवि और अमेरिकी रणनीति पर असर
गाजा में 47,000 लोगों को जान गंवानी पड़ी जिनमें महिलाओं व बच्चों का समावेश था। जो रोटी लेने बाहर निकला, गोलियों से भून दिया गया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इजराइल की सैनिक कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन हुआ।
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पिछले 9 महीनों में फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले देशों में ब्रिटेन, फ्रांस और कनाड़ा जैसे जी-7 देश शामिल हो गए हैं। यह इजराइल के प्रति पश्चिमी देशों के रुख में बदलाव का संकेत माना जाता है।डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि इजराइल लेबनान पर हमले करना बंद करे। ऐसा करना ईरान से शांति वार्ता में बाधक है। अमेरिका जल्द ही ईरान युद्ध से बाहर निकलना चाहता है क्योंकि अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
