इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Netanyahu Warning Iran Ceasefire End News: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बेहद गंभीर बयान दिया है। सोमवार (13 अप्रैल) को नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि ईरान के साथ मौजूदा युद्धविराम का समय अब समाप्त होने की कगार पर है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता विफल हो चुकी है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इजरायल की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यदि उनकी सरकार ने समय रहते सैन्य कार्रवाई न की होती, तो आज स्थिति भयावह होती। उन्होंने ईरान के परमाणु और रणनीतिक ठिकानों नतांज, फोर्डो और बुशहर की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी द्वारा स्थापित कुख्यात यातना केंद्रों से की।
ראש הממשלה נתניהו בישיבת הממשלה: “הלחימה נמשכת כל הזמן. אנחנו תומכים בעמדה התקיפה של הנשיא טראמפ להטיל מצור ימי על איראן. אנו מתואמים עם ארה”ב כל הזמן – שוחחתי אתמול עם סגן הנשיא ואנס שהבהיר שהנושא המרכזי הוא הוצאת כל החומר המועשר ולהבטיח שאין יותר העשרה”https://t.co/ec3SmdeZWr pic.twitter.com/mvrl0LaVdN — ראש ממשלת ישראל (@IsraeliPM_heb) April 13, 2026
नेतन्याहू ने कहा कि अगर इजरायल सख्त कदम नहीं उठाता, तो इन जगहों को ऑशविट्ज (Auschwitz), माजदा नेक (Majdanek) और सोबिबोर (Sobibor) की तरह याद किया जाता, जहां लाखों बेगुनाहों की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई थी।
नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाई गई समुद्री नाकेबंदी और नौसैनिक घेराबंदी का जोरदार स्वागत किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का बार-बार उल्लंघन किया है, जिसके कारण इस तरह के सख्त रुख की आवश्यकता पड़ी। इजरायली पीएम ने कहा कि उनका देश अपनी ‘शक्ति के शिखर’ पर है और वे ट्रंप के इस मजबूत फैसले का पूरी तरह समर्थन करते हैं।
इस संकट के बीच नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर विस्तार से चर्चा की है। वेंस ने उन्हें वार्ता में हो रहे घटनाक्रमों और अमेरिकी रणनीति के बारे में जानकारी दी। नेतन्याहू के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप और संयुक्त राज्य अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान से सभी संवर्धित परमाणु सामग्री (Enriched Material) को हटाना है। अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आने वाले कई दशकों तक ईरान में किसी भी प्रकार का परमाणु संवर्धन न हो सके।
एक ओर जहां युद्ध की धमकियां मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक रास्ते तलाशने की कोशिशें भी जारी हैं। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा है कि तेहरान अमेरिका के साथ शांति वार्ता के एक और दौर के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तभी संभव है जब अमेरिका अपनी ‘गैर-कानूनी’ मांगें वापस ले और ईरान की शर्तों को स्वीकार करे।
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फथाली ने यह भी कहा कि इस संकटपूर्ण स्थिति में ईरान और भारत का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह होगा कि नेतन्याहू की इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्या रुख अपनाता है और क्या सीजफायर वास्तव में समाप्त होकर एक बड़े युद्ध में बदल जाएगा।