ईरान के मंसूबों पर ट्रंप-नेतन्याहू का ‘फुल स्टॉप’, जानें क्यों इजरायल ने कहा- अब सुरक्षित है दुनिया?
Netanyahu Trump Iran Deal: नेतन्याहू और ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर सहमत हुए हैं। जानें इस 'फ्रेमवर्क एग्रीमेंट' की मुख्य बातें।
- Written By: अमन उपाध्याय
नेतन्याहू ट्रंप का ईरान न्यूक्लियर फ्री डील समझौता, AI डिजाइन फोटो
Netanyahu Trump Iran Deal Framework Agreement: मीडिल ईस्ट में दशकों से चले आ रहे परमाणु तनाव को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक जीत का दावा किया जा रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने या हासिल करने नहीं देंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ‘फ्रेमवर्क समझौते’ को मंजूरी मिल गई है, जो तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों पर स्थायी रूप से लगाम लगाएगा।
जब तक मैं हूं, परमाणु बम नहीं
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर अपना रुख कड़ा करते हुए कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।
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उन्होंने आगे कहा कि जब तक वह इजरायल के प्रधानमंत्री हैं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। नेतन्याहू के अनुसार, यदि उन्होंने यह वैश्विक अभियान नहीं चलाया होता, तो ईरान बहुत पहले ही इजरायल को नष्ट करने के लिए परमाणु बम विकसित कर चुका होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक लक्ष्य पर वह और राष्ट्रपति ट्रंप पूरी तरह से एकमत हैं。
यूरोप में होंगे समझौते पर हस्ताक्षर
व्हाइट हाउस से जारी बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के साथ युद्ध को टालने वाला एक ‘बड़ा समझौता’ अंतिम चरण में पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि एक विस्तृत मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) तैयार कर लिया गया है, जिस पर संभवतः इसी सप्ताह के अंत तक यूरोप में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता ने इस व्यवस्था को अपनी मंजूरी दे दी है। यह समझौता ईरान को किसी भी रूप में परमाणु हथियार खरीदने या विकसित करने से पूरी तरह प्रतिबंधित करेगा।
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सैन्य दबाव और क्षेत्रीय कूटनीति का असर
डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया कि हाल के दिनों में ईरान पर बनाए गए भीषण सैन्य दबाव ने ही तेहरान को इस समझौते की मेज पर आने के लिए मजबूर किया है। इस प्रस्तावित समझौते को लेकर अमेरिका ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि इजरायल, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय देशों के नेताओं से भी गहन चर्चा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाने में मील का पत्थर साबित होगा।
