अब बच्चों को AI चैटबॉट का आदी बनाना पड़ेगा भारी, अमेरिकी संसद में पेश हुआ Addictive Design Act
AI Chatbot Addictive Act: US में नाबालिगों को एआई चैटबॉट के मानसिक दुष्प्रभाव और लत से बचाने के लिए एडिक्टिव डिजाइन एक्ट पेश किया गया है। नियमों के उल्लंघन पर कंपनियों पर करोड़ों का जुर्माना लगेगा।
- Written By: अमन उपाध्याय
AI कंपनियों को अमेरिका की चेतावनी, सांकेतिक एआई फोटो
US AI Addictive Design Act: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दौर में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिका में नाबालिगों को एआई चैटबॉट्स के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए एक बड़ा कानूनी कदम उठाया गया है। वर्मोंट से डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि बेका बालिंट ने एडिक्टिव डिज़ाइन एक्ट पेश किया है।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य एआई चैटबॉट बनाने वाली कंपनियों को ऐसे फीचर्स विकसित करने से रोकना है, जो बच्चों में भावनात्मक निर्भरता, अत्यधिक उपयोग और लत को बढ़ावा देते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संकट और एआई का सहारा
यह विधेयक ऐसे संवेदनशील समय में लाया गया है जब बड़ी संख्या में किशोर अपनी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अकेलेपन को दूर करने के लिए एआई चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं।
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हालांकि, विशेषज्ञों और बालिंट के कार्यालय का मानना है कि अधिकांश चैटबॉट्स को इस तरह से डिजाइन नहीं किया गया है कि वे किसी मानसिक संकट से गुजर रहे युवा को सुरक्षित या उचित परामर्श दे सकें। बालिंट ने कड़े शब्दों में कहा कि तकनीकी कंपनियों को अपनी वही पुरानी ‘ध्यान खींचने वाली रणनीतियां’ उन बच्चों पर लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जो पहले से ही संकट में हैं।
इन फीचर्स पर गिरेगी गाज, लगेगा भारी जुर्माना
प्रस्तावित कानून के तहत कई लोकप्रिय एआई फीचर्स को खतरनाक की श्रेणी में रखा गया है। इसमें टाइपिंग बबल्स डिजिटल अवतार और पुरानी बातचीत के आधार पर व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग करना शामिल है।
इसके अलावा, अगर कोई चैटबॉट किसी वास्तविक व्यक्ति का रूप धरता है या दो घंटे से अधिक समय तक लगातार बातचीत की अनुमति देता है, तो उसे ‘एडिक्टिव डिजाइन’ माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर प्रति प्रभावित नाबालिग 5,000 डॉलर तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकता है।
AI चैटबॉट एडिक्शन, एआई फोटो
रिसर्च और जागरूकता के लिए करोड़ों का फंड
विधेयक में केवल पाबंदियां ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के व्यापक इंतजाम भी किए गए हैं। इसके तहत एक अंतर-एजेंसी टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जो युवाओं के लिए एआई के जोखिमों पर अपनी सिफारिशें देगी।
साथ ही, वैज्ञानिक शोध के लिए 30 लाख डॉलर और माता-पिता व शिक्षकों के बीच जागरूकता फैलाने वाले कार्यक्रमों के लिए 50 लाख डॉलर की राशि आवंटित करने का प्रस्ताव है। कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे शोधकर्ताओं को आवश्यक डेटा उपलब्ध कराएं ऐसा न करने पर उन पर 1 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है।
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डॉक्टर का विकल्प नहीं है एआई चैटबॉट
अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन की सीईओ डॉ. मार्केटा एम. विल्स का कहना है कि एआई भले ही सेवाओं में सुधार कर सकता है, लेकिन यह कभी भी डॉक्टर और मरीज के वास्तविक मानवीय संबंध का स्थान नहीं ले सकता। सुरक्षित और साक्ष्य-आधारित उपचार के लिए विशेषज्ञ का परामर्श अनिवार्य है।
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वहीं, सेंटर फॉर हेल्थ एंड डेमोक्रेसी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि बच्चों की मानसिक सेहत की कीमत पर कंपनियों को मुनाफा कमाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
