नेपाल के पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Nepal Ex PM Sher Bahadur Deuba Arrest Warrant: नेपाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ नई सरकार के सख्त रुख के बीच काठमांडू जिला अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर रही एजेंसियों की मांग पर जज महेंद्र खड़का की पीठ ने मंजूर की है।
इस पूरे मामले की जड़ पिछले साल सितंबर में हुए ‘जेन-जी’ आंदोलन से जुड़ी है। जांच के दौरान कई नेताओं के ठिकानों से जली हुई नकदी की तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे जिनमें देउबा के घर के दृश्य भी शामिल थे। फॉरेंसिक जांच में यह पुष्टि हुई कि वे नोट असली थे जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला और गंभीर हो गया और व्यापक जांच शुरू की गई।
नेपाल में 5 मार्च को हुए चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। नई सरकार ने सत्ता संभालते ही भ्रष्टाचार के पुराने मामलों को फिर से खोल दिया है। देउबा से पहले एक और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर भी कानूनी शिकंजा कसा जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई देश की राजनीति को साफ-सुथरा बनाने के अभियान का हिस्सा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी फिलहाल नेपाल में नहीं हैं। वे 26 फरवरी को इलाज के लिए सिंगापुर गए थे और उसके बाद हांगकांग चले गए, जहां से वे अभी तक वापस नहीं लौटे हैं। उनकी अनुपस्थिति को देखते हुए नेपाली जांच एजेंसियां अब उन्हें वापस लाने के लिए इंटरपोल (Interpol) की मदद से ‘रेड नोटिस’ जारी कराने की तैयारी कर रही हैं।
यह भी पढ़ें:- भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया अध्याय! जयशंकर से मिले खलीलुर रहमान, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग पर बनी सहमति
शेर बहादुर देउबा नेपाल के पांच बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं और 1991 से देश की सक्रिय राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। हालांकि, मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर आरोप और गिरफ्तारी वारंट ने उनके दशकों पुराने राजनीतिक करियर को गहरे संकट में डाल दिया है।