अमेरिका में विरोध प्रदर्शन के बीच तैनात पुलिस, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Minneapolis Violence News In Hindi: अमेरिका का मिनेसोटा राज्य एक बार फिर हिंसा और अशांति की आग में जल रहा है। हाल ही में अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एजेंटों द्वारा 37 वर्षीय एलेक्स प्रेट्टी की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद मिनेपोलिस की सड़कों पर अराजकता का माहौल है। स्थानीय नागरिक इसे ट्रंप प्रशासन की ‘तानाशाही’ और ‘फासीवाद’ का संकेत मान रहे हैं।
मिनेसोटा में तैनात फेडरल एजेंटों का व्यवहार विवादों के घेरे में है। चश्मदीदों और वीडियो फुटेज के अनुसार, हेलमेट, गैस मास्क और कैमोफ्लाज वर्दी पहने ये एजेंट सैन्य अंदाज में ऑपरेशन चला रहे हैं। एक चौंकाने वाली घटना में, टीवी माइक पर एक एजेंट को यह कहते सुना गया कि यह सब ‘कॉल ऑफ ड्यूटी’ जैसा ‘कूल’ लग रहा है। इसी मानसिकता के बीच, एजेंटों ने एलेक्स प्रेट्टी को जमीन पर पटका और उन्हें गोली मार दी।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) का दावा है कि एजेंटों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई क्योंकि प्रेट्टी के पास हैंडगन थी। हालांकि, घटना के वायरल वीडियो से पता चलता है कि प्रेट्टी के हाथ में बंदूक नहीं बल्कि केवल एक फोन था। यह घटना उसी स्थान के पास हुई है जहां कुछ दिन पहले रेनी गुड की हत्या हुई थी और जहां 2020 में जॉर्ज फ्लॉयड की जान गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन राज्यों और शहरों को निशाना बना रहे हैं जहाँ डेमोक्रेटिक पार्टी का शासन है और जहां अश्वेत आबादी अधिक है। मिनेसोटा में लगभग 3,000 ICE अफसरों की तैनाती की गई है जो वहां की स्थानीय पुलिस की संख्या से भी अधिक है। ट्रंप की मिनेसोटा से नाराजगी पुरानी है क्योंकि वे यहां लगातार तीन बार चुनाव हार चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने हाल ही में यहां रहने वाली सोमाली आबादी को ‘लो-IQ वाले लोग’ कहकर संबोधित किया था।
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मिनेपोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने सवाल उठाया कि इस ऑपरेशन को रोकने के लिए और कितने अमेरिकियों को अपनी जान गंवानी होगी। वहीं, अमेरिकी सांसद एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज (AOC) ने इसे संविधान की धज्जियां उड़ाना बताया और मांग की कि सीनेट को तत्काल ICE की फंडिंग रोक देनी चाहिए। इतिहासकार गैरेट ग्रैफ ने इस स्थिति की तुलना फासीवाद से करते हुए कहा कि अमेरिका का एक शहर इस समय ‘सीक्रेट पुलिस’ की कैद में जी रहा है।