खाड़ी देशों की ओर बढ़ रहा ‘महातूफान’, ईरान से लेकर UAE तक मचेगी तबाही, हाई अलर्ट पर मिडिल ईस्ट
Gulf Weather Alert: खाड़ी देशों पर 'कट-ऑफ लो' तूफान का खतरा मंडरा रहा है। यूएई, सऊदी अरब और ओमान में रिकॉर्ड तोड़ बारिश और बाढ़ की आशंका है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है।
- Written By: अक्षय साहू
मध्य पूर्व में तूफान की चेतावनी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Middle East Storm Alert: करीब एक महीने से संघर्ष झेल रहे मिडिल ईस्ट के देशों पर अब एक नया और असामान्य खतरा मंडरा रहा है। फारस की खाड़ी के ऊपर एक शक्तिशाली तूफान बन रहा है, जो यूएई, ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में भारी तबाही ला सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सामान्य मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि “कट-ऑफ लो प्रेशर सिस्टम” है, जो रेगिस्तानी इलाकों में भी तेज बारिश और बवंडर जैसी खतरनाक स्थितियां पैदा कर सकता है।
रिकॉर्ड बारिश होने की आशंका
इस तूफान की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ क्षेत्रों में अगले 2-3 दिनों के भीतर 100 मिमी से लेकर 500 मिमी तक बारिश हो सकती है। यह उन देशों के लिए बेहद चिंताजनक है, जहां पूरे साल में इतनी बारिश नहीं होती। अनुमान है कि गुरुवार और शुक्रवार को यह सिस्टम अपने चरम पर रहेगा, जिससे अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। सऊदी अरब और यमन के कुछ इलाकों में “हबूब” (धूल भरा तूफान) और रेगिस्तानी बवंडर उठने की भी संभावना जताई गई है।
दुबई में फिर बन सकते हैं बाढ़ जैसे हालात
दुबई में 2024 जैसी स्थिति दोबारा बनने का खतरा बना हुआ है। अप्रैल 2024 में यहां 75 साल की सबसे भारी बारिश हुई थी, जब 15 से 17 अप्रैल के बीच दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 6.45 इंच बारिश दर्ज की गई थी। उस दौरान रनवे पानी में डूब गए थे और 1200 से ज्यादा फ्लाइटें रद्द करनी पड़ी थीं। आमतौर पर दुबई में सालभर में करीब 4 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार सिर्फ एक-दो दिनों में 3 से 6 इंच बारिश होने की संभावना है।
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मार्च 2019 में ईरान, इराक और सीरिया में भारी बारिश से अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था। 2022 में सऊदी अरब के जेद्दाह में सिर्फ 6 घंटे में 179 मिमी बारिश ने भीषण बाढ़ ला दी थी। वहीं 2020 में एक बड़े तूफान ने मिस्र से लेकर ईरान तक 9 देशों को प्रभावित किया था।
हाई रिस्क पर कई इलाके
सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों मक्का, अल बाहा और जाजन के अलावा उत्तर-पश्चिम में तमाहा और यमन के अजल क्षेत्र में भी भारी असर की आशंका है। वहीं अबू धाबी और शारजाह जैसे शहर भी खतरे की जद में हैं। रेगिस्तानी शहरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती जल निकासी व्यवस्था होगी, क्योंकि वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर इतनी भारी बारिश के लिए तैयार नहीं है।
हवाई सेवाओं पर असर संभव
खराब मौसम का असर हवाई यात्रा पर भी पड़ सकता है। दुबई और अबू धाबी के व्यस्त एयरपोर्ट अलर्ट पर हैं। जरूरत पड़ने पर उड़ानों को डायवर्ट या रद्द किया जा सकता है। तेज बारिश और हवाओं के कारण रनवे ऑपरेशन अस्थायी रूप से बंद करने की नौबत भी आ सकती है।
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अलर्ट पर खाड़ी देश
संभावित आपदा को देखते हुए खाड़ी देशों की सरकारें पूरी तरह सतर्क हैं। यूएई, ओमान और सऊदी अरब में इमरजेंसी सेवाओं को स्टैंडबाय पर रखा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। कई जगह वर्क फ्रॉम होम लागू करने की तैयारी है, जबकि अबू धाबी में कुछ सड़कों पर वाहनों की गति कम कर दी गई है। फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी कर लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है।
