इजरायल वाली कार्रवाई करो! बलूच नेता की भारत को सलाह, कहा- पाकिस्तान एक महीने भी नहीं टिकेगा
Red Fort Srinagar Blast: दिल्ली के लाल किले और श्रीनगर में हुए हालिया आतंकी हमलों पर बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीर का दावा है कि भारत पर हमला असल...
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक (डिजाइन, फोटो)
India Pakistan Conflict: दिल्ली में लाल किले के पास हुए आतंकी हमले और इसके बाद श्रीनगर में हुए विस्फोट ने एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी संदर्भ में बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच का कड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि भारत में हुआ हमला पाकिस्तान की ओर से परोक्ष रूप से युद्ध की घोषणा के बराबर है।
मीर यार ने एक्स पर लिखा कि बीते 78 वर्षों में दुनिया को पाकिस्तान के साथ संबंधों से केवल आतंकवाद, अस्थिरता, परमाणु ब्लैकमेल और आर्थिक संकटों का ही सामना करना पड़ा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से बलूचिस्तान के संसाधनों के दोहन पर टिकी है, जबकि उसकी सेना दशकों से आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देती रही है।
इजरायल की तरह रूख अपनाए भारत
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान एक बार फिर भारत में 1990 के दशक जैसी स्थितियां दोहराने की कोशिश कर रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर आतंकवादी गतिविधियां, अस्थिरता और हिंसा शामिल थीं।
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मीर यार ने कहा कि बलूचिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि पाकिस्तान के लिए आतंकवाद उसकी रणनीति का हिस्सा है और उससे पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है। ऐसे में भारत को इजरायल की तरह दृढ़ और निर्णायक रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ लंबे समय तक संघर्ष झेलने की क्षमता नहीं रखता, इसलिए भारत को पाकिस्तान-प्रेरित आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाना चाहिए।
दस अतिरिक्त हवाई अड्डे बनाने की सलाह
बलूच कार्यकर्ता ने अफगानिस्तान के संदर्भ में भी भारत को सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत को बगराम के अलावा अफगानिस्तान में कम से कम दस अतिरिक्त हवाई अड्डे बनाने चाहिए ताकि सैन्य अभियानों को समर्थन मिल सके। इसके अलावा अफगानिस्तान को अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइलें और रक्षा प्रणाली उपलब्ध करानी चाहिए।
मीर ने यह भी जोर दिया कि भारत को बलूचिस्तान और अफगानिस्तान दोनों को आपातकालीन आधार पर खुले तौर पर सैन्य और रक्षात्मक सहायता प्रदान करनी चाहिए। उनके अनुसार, दिल्ली और काबुल को मिलकर एक भारत-अफगानिस्तान-बलूचिस्तान त्रिपक्षीय सम्मेलन आयोजित करना चाहिए, ताकि पाकिस्तान की ‘छद्म युद्ध’ रणनीति का मुकाबला किया जा सके।
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उन्होंने दावा किया कि यदि भारत बलूच नेताओं को औपचारिक रूप से आमंत्रित करता है, तो यह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के “ताबूत की आखिरी कील” साबित होगा। मीर यार का मानना है कि भारत और अफगानिस्तान में स्थायी शांति तभी संभव है जब बलूचिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सके।
