शशि थरूर ने खुद माना कांग्रेस महिला विरोधी? रिजिजू के बयान पर सियासी बवाल तय!

Kiren Rijiju: केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने दावा किया है कि शशि थरूर ने व्यक्तिगत बातचीत में कांग्रेस के 'महिला विरोधी' रुख को स्वीकार किया। महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर वार-पलटवार तेज हो गया है।
मानसून सत्र पर रिजिजू का बड़ा दावा: सरकार ने सब हासिल किया, विपक्ष रहा खाली हाथ
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (फोटो- सोशल मीडिया)
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Kiren Rijiju on Shashi Tharoor: महिला आरक्षण को लेकर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बातचीत के दौरान “स्वीकार” किया कि उनकी पार्टी का रुख महिला विरोधी रहा है।

रिजिजू ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि संसद सत्र के बाद उनकी मुलाकात थरूर से संसद भवन में हुई थी। उनके मुताबिक, इस दौरान थरूर ने कहा कि भले ही कांग्रेस को महिला विरोधी कहा जाए, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई महिला विरोधी नहीं मानेगा। इस पर रिजिजू ने जवाब दिया कि भले ही थरूर व्यक्तिगत रूप से ऐसे न हों, लेकिन उनकी पार्टी का रुख महिलाओं के प्रति सही नहीं रहा।

शशि थरूर को लेकर क्या बोले रिजिजू?

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इस बातचीत से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर स्वीकार्यता है। हालांकि, इस दावे पर शशि थरूर या कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे पहले भी किरण रिजिजू महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी दलों की आलोचना कर चुके हैं। उनका आरोप था कि विपक्ष ने संसद में इस विधेयक का समर्थन नहीं किया और महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने का काम किया।

महिला आरक्षण पर विवाद

दरअसल, प्रस्तावित संशोधन के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की योजना थी। लेकिन विपक्षी दलों ने सीटों की संख्या बढ़ाने का विरोध करते हुए बिना परिसीमन के ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग की।

विपक्ष का तर्क है कि सीटों का विस्तार राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है और इससे कुछ राज्यों, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के साथ असमानता हो सकती है। इसी कारण संसद में इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई और विधेयक पारित नहीं हो सका। यह पूरा विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी का रूप ले चुका है, जहां सत्तापक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

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