बस कंडक्टर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति कैसे बने मादुरो? भारत के इस बाबा को मानते हैं अपना गुरु
US Captured Nicolas Maduro: अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया। मादुरो कभी मेट्रो बस ड्राइवर के रूप में काम किया करते थे।
- Written By: अक्षय साहू
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (सोर्स- सोशल मीडिया)
Venezuela President Nicolas Maduro Story: अमेरिकी सेना ने शनिवार को वेनेजुएला की राजधानी कराकस में बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इस दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर गंभीर आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा। मादुरो की इस गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उनके नाम की तुलना इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन से की जा रही है। दोनों ही गरीबी से उठकर देश के सबसे ताकतवर नेताओं में शामिल हुए।
निकोलस मादुरो का जन्म कराकस में हुआ था। उन्होंने कभी मेट्रो बस ड्राइवर के रूप में काम किया और ट्रांसपोर्ट ट्रेड यूनियन के सदस्य भी रहे। मादुरो वामपंथी परिवार में जन्मे उनके पिता भी ट्रेड यूनियन लीडर थे।
सत्य साईं बाबा को मानते थे अपना गुरु
धार्मिक रूप से मादुरो रोमन कैथोलिक ईसाई हैं, लेकिन उनका दावा है कि उनके दादा-दादी यहूदी थे और वो खुद भारत में सत्य साईं बाबा को अपना गुरु मानते थे।
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फर्श से अर्श तक का सफर
उनकी राजनीतिक यात्रा 1992 में शुरू हुई, जब उन्होंने राष्ट्रपति कार्लोस एंड्रेस पेरेज को सत्ता से हटाने और ह्यूगो शावेज़ को जेल से रिहा कराने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। शावेज़ की रिहाई के बाद मादुरो उनके प्रमुख शागिर्द बन गए और फिफ्थ रिपब्लिक मूवमेंट में सक्रिय हुए।
1999 में मादुरो को राष्ट्रीय संविधान सभा के लिए चुना गया और नए संविधान का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। 2000 में वे नेशनल असेंबली के सदस्य बने और शावेज़ की सरकार में 2006 से 2013 तक विदेश मंत्री रहे। शावेज़ ने 2012 में मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और 2013 में शावेज़ की मृत्यु के बाद मादुरो अंतरिम राष्ट्रपति बने।
2013 में पहली बार बने राष्ट्रपति
14 अप्रैल 2013 को हुए राष्ट्रपति चुनाव में मादुरो ने बेहद कम अंतर (लगभग 2%) से जीत हासिल की। हालांकि, उन्होंने विपक्षी दल की मांग पर वोटों की दोबारा गिनती करने से इनकार कर दिया। सत्ता संभालते ही मादुरो ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोला और तीन अमेरिकी राजनयिकों को देश से निकाल दिया। उनके शासनकाल में सामाजिक और नागरिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगा। 2014 में कई अमेरिकी पत्रकारों को भी वेनेजुएला से निकाला गया।
तानाशाही और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप
मादुरो पर तानाशाही, चुनावी धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और विद्रोहियों को कुचलने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। उनके शासन में यूएन मानवाधिकार संगठन के अनुसार 20,000 से अधिक लोगों की हत्या हुई और लगभग 70 लाख नागरिक देश छोड़कर भाग गए।
ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही कार्रवाई तेज
ट्रंप प्रशासन ने मादुरो और उनके करीबियों पर प्रतिबंध लगाए और नशीली दवाओं की तस्करी का आरोप लगाया। 24 नवंबर 2025 को अमेरिका ने मादुरो और उनके सहयोगियों को विदेशी आतंकवादी संगठन के सदस्य के रूप में घोषित किया। इसके बाद अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वेनेजुएला की नौकाओं पर हमले शुरू कर दिए।
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मादुरो ने वेनेजुएला की रक्षा के लिए आपातकाल लगाने का एलान किया और रूस से प्राप्त 5000 मिसाइलों को सैन्य ठिकानों पर तैनात करने का दावा किया। 30 नवंबर 2025 को मादुरो ने तेल संगठन ओपेक को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने वेनेजुएला के तेल उत्पादन में बाधा डालने और अमेरिका द्वारा देश पर आर्थिक नाकेबंदी लगाने का आरोप लगाया और अब राजधानी कराकस में हमला करके कैद करके अपने साथ अमेरिका ले गए हैं।
