फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Macron Israel Lebanon Peace Talks: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने और एक और बड़े युद्ध को टालने के लिए फ्रांस ने कूटनीतिक मोर्चा खोल दिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए इराक, लेबनान और इजरायल के साथ उच्च स्तरीय बातचीत शुरू की है। मैक्रों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लेबनान को अराजकता की आग में झोंकने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस प्रयासों की जरूरत है।
इस कूटनीतिक हलचल की शुरुआत एक दुखद घटना से हुई। इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में ईरान द्वारा किए गए एक ड्रोन हमले में फ्रांस के फर्स्ट असिस्टेंट अर्नुद फ्रायॉन की मौत हो गई। इस हमले में कई अन्य फ्रांसीसी सैनिक घायल भी हुए हैं। राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि उन्होंने इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी से इस विषय पर विस्तार से बात की है। इराकी प्रधानमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और इराक में मौजूद फ्रांसीसी सेना की सुरक्षा को मजबूत करने का वादा किया है, ताकि वे मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ सकें।
इराक में स्थिति को संभालने के साथ-साथ, राष्ट्रपति मैक्रों का मुख्य ध्यान इजरायल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष को रोकना है। उन्होंने घोषणा की है कि फ्रांस इन दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने के लिए मध्यस्थता करने को पूरी तरह तैयार है। मैक्रों ने एक महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए कहा कि लेबनान का नेतृत्व अब इजरायल के साथ सीधी बातचीत करने के लिए तैयार है,।
मैक्रों ने दोनों पक्षों को संयम बरतने की कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने हिज्बुल्लाह से अपनी ‘बेपरवाही’ और उकसावे वाली हरकतों को तुरंत रोकने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने इजरायल से आग्रह किया है कि वह किसी भी बड़े पैमाने पर हमले के विचार को त्याग दे और कूटनीतिक समाधान का रास्ता अपनाए। मैक्रों का मानना है कि लेबनान की संप्रभुता की रक्षा करना और उसे ‘अफरा-तफरी’ में जाने से रोकना पूरी दुनिया के हित में है। उन्होंने इजरायल को सलाह दी कि उसे लेबनानी अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू करने के इस सुनहरे मौके का फायदा उठाना चाहिए।
यह भी पढ़ें:- इजरायल के पीएम नेतन्याहू की मौत? सोशल मीडिया पर इस वायरल VIDEO ने मचाया तहलका, जानें क्या है सच्चाई
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने एक बड़ा प्रस्ताव देते हुए कहा कि फ्रांस इन महत्वपूर्ण वार्ताओं को पेरिस में आयोजित करने और उन्हें आसान बनाने के लिए तैयार है। उनका लक्ष्य एक ऐसा स्थायी समाधान खोजना है जिससे इलाके में तनाव कम हो और लेबनान की आजादी व संप्रभुता सुरक्षित रहे।