उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन अपनी बेटी किम जू ए के साथ (सोर्स-सोशल मीडिया)
North Korea Missile Test Successor Training: उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन एक बार फिर अपनी किशोर बेटी किम जू ए के साथ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते नजर आए। इस बार वे एक नौसेना युद्धपोत से दागी गई रणनीतिक क्रूज मिसाइलों के सफल परीक्षण की निगरानी करने के लिए पहुंचे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि किम अपनी बेटी को सार्वजनिक कार्यक्रमों में ले जाकर उसे देश की बागडोर संभालने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास से क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
सरकारी मीडिया के अनुसार किम जोंग उन अपनी 13 साल की बेटी को लगातार सैन्य और रणनीतिक कार्यक्रमों में साथ रख रहे हैं। दिसंबर 2022 से ही किम जू ए को मिसाइल लॉन्चिंग और सैन्य परेड जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में प्रमुखता से दिखाया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी का भी दावा है कि किम जल्द ही अपनी इस बेटी को आधिकारिक तौर पर अपना उत्तराधिकारी घोषित करेंगे।
मंगलवार को हुए इस परीक्षण में पुराने नौसेना डिस्ट्रॉयर ‘चोए ह्योन’ से कई रणनीतिक क्रूज मिसाइलें समुद्र की ओर छोड़ी गई थीं। किम और उनकी बेटी ने कॉन्फ्रेंस रूम में बैठकर स्क्रीन पर मिसाइलों द्वारा अपने लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगाते हुए लाइव देखा। तानाशाह ने इस दौरान कहा कि देश की सुरक्षा के लिए एक भरोसेमंद परमाणु युद्ध रोकथाम क्षमता बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
किम जोंग उन ने कहा कि इन परीक्षणों का मुख्य मकसद नौसेना की रणनीतिक ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करना है। सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों में हथियार चलाने का अभ्यास कराने के लिए ये परीक्षण करना उत्तर कोरिया के लिए आवश्यक था। मिसाइलों ने उत्तर कोरिया के पश्चिमी तट के पास स्थित लक्ष्य वाले द्वीपों पर बिना किसी चूक के बिल्कुल सटीक निशाना लगाया।
उत्तर कोरिया ने यह शक्ति प्रदर्शन ठीक उसी दिन किया जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया का ‘फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास शुरू हुआ था। किम की बहन किम यो जोंग ने इसे ‘आक्रमण का रिहर्सल’ बताते हुए दुश्मनों को अपनी सैन्य शक्ति से नेस्तनाबूद करने की धमकी दी। तानाशाह अपनी बेटी को इन प्रक्रियाओं का हिस्सा बनाकर यह संदेश देना चाहते हैं कि उत्तर कोरिया का भविष्य सैन्य रूप से सशक्त है।
‘फ्रीडम शील्ड’ नाम का यह 11 दिनों का लंबा अभ्यास मुख्य रूप से कंप्यूटर सिमुलेशन और फील्ड ट्रेनिंग पर आधारित बताया गया है। उत्तर कोरिया इसे अपने प्रति ‘गहरी नफरत’ का प्रतीक मानता है और इसीलिए वह अपनी सैन्य तैयारियों को लगातार बढ़ा रहा है। प्योंगयांग अक्सर इन पश्चिमी देशों के सैन्य युद्धाभ्यास का जवाब अपने अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों का परीक्षण करके ही देता आया है।