क्या है मुनरो डॉक्ट्रिन? जिसके चक्कर में ट्रंप ने पूरे यूरोप को बना लिया अपना दुश्मन, सामने आए सबूत

Keir Starmer China Visit: ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर की चीन यात्रा अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों, मुनरो डॉक्ट्रिन और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलते समीकरणों की ओर इशारा करती है।
US Monroe Doctrine policy
मुनरो सिद्धांत से विदेश नीति तय तक कर रहे डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US Monroe Doctrine: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर हाल ही में चीन की यात्रा पर पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह पिछले आठ वर्षों में किसी भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा है। हालांकि, इस दौरे को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपने सहयोगी देशों पर दबाव बनाने और अमेरिकी प्रभाव को जबरन बढ़ाने की नीति अपनाते रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि ब्रिटेन जैसे पुराने और करीबी सहयोगी भी अब अमेरिका से कुछ दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। इराक और अफगानिस्तान जैसे युद्धों में अमेरिका के साथ खड़ा रहने वाला ब्रिटेन अब चीन के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है।

जिनपिंग से मिलकर क्या बोले स्टार्मर?

शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान कीर स्टार्मर ने कहा, “चीन वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है। हम चीन के साथ समझदारी और संतुलन के साथ संबंध बनाना चाहते हैं।” उन्होंने साफ किया कि ब्रिटेन अब दुनिया से ज्यादा जुड़ना चाहता है और राष्ट्रीय हितों के लिए चीन के साथ सहयोग जरूरी है। स्टार्मर ने कहा, “यह ब्रिटिश जनता के हित में है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से जुड़ना हमारे लिए फायदेमंद है। हांगकांग सहित चीन हमारा तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।”

मुनरो डॉक्ट्रिन क्या है?

इसी बीच अमेरिका की पुरानी नीति मुनरो डॉक्ट्रिन पर भी चर्चा तेज हो गई है। यह नीति 1823 में राष्ट्रपति जेम्स मुनरो ने घोषित की थी, जिसका मकसद यूरोपीय शक्तियों को अमेरिकी महाद्वीप यानी पश्चिमी गोलार्ध में नए उपनिवेश बनाने या हस्तक्षेप से रोकना था। अमेरिका ने इसे यूरोप के लिए ‘बंद क्षेत्र’ घोषित किया। 20वीं सदी में इस नीति का विस्तार हुआ और अमेरिका ने पूरे क्षेत्र पर अपना प्रभाव मानना शुरू कर दिया। आरोप है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इसी सोच को और ज्यादा आक्रामक रूप दे दिया है। वह चाहते हैं कि पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका का दबदबा बना रहे और चीन या रूस जैसे देश वहां दखल न दें।

क्या ट्रंप मुनरो डॉक्ट्रिन को आगे बढ़ा रहे हैं?

मुनरो डॉक्ट्रिन की आड़ में ट्रंप प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए, जिससे यूरोपीय देश असहज हो गए। वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी, पनामा नहर पर दबाव, और ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी इन सबने डेनमार्क और यूरोप के साथ अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ाया है।

ऐसे माहौल में कीर स्टार्मर की चीन यात्रा अमेरिका के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखी जा रही है। स्टार्मर ने कहा कि आठ साल बाद किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री का चीन आना काफी देर से उठाया गया कदम है। उनकी शी जिनपिंग के साथ बैठक तय समय से कहीं ज्यादा चली 40 मिनट की बैठक बढ़कर करीब 1 घंटे 20 मिनट तक चली जिससे दोनों देशों के बीच गंभीर बातचीत के संकेत मिले। स्टार्मर ने कहा कि मतभेदों को संभालते हुए नए अवसर तलाशने होंगे, क्योंकि वैश्विक घटनाओं का असर घरेलू कीमतों और जीवन-यापन पर पड़ता है। उन्होंने जोर दिया, “हम एक रणनीतिक, स्थिर और व्यापक दृष्टिकोण अपनाएंगे।”

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