भूकंप के खतरे से कांप रहा जापान! टोक्यो के बाद अब दूसरी राजधानी बनाने की तैयारी, जानें कौन सा शहर है सबसे आगे
Japan Second Capital: जापान में भूकंप के खतरे को देखते हुए सना ताकाइची सरकार ने बैकअप राजधानी बनाने का फैसला लिया है। टोक्यो के नीचे सक्रिय फॉल्ट लाइन्स और 70% खतरे के बीच ओसाका रेस में सबसे आगे है।
- Written By: अमन उपाध्याय
टोक्यो के बाद अब दूसरी राजधानी बनाने की तैयारी जापान, सांकेतिक (AI मॉडिफाइड फोटो)
Japan New Capital News In Hindi: अपनी तकनीक और आधुनिकता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर जापान की राजधानी टोक्यो पर आने वाले समय में महाविनाश का खतरा मंडरा रहा है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए जापान की सना ताकाइची सरकार ने देश की एक दूसरी राजधानी विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
सरकार का मानना है कि भविष्य की अनिश्चितताओं और प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए देश के पास एक मजबूत प्रशासनिक विकल्प होना अनिवार्य है।
टोक्यो पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?
वैज्ञानिकों और भूगर्भ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 30 वर्षों के भीतर टोक्यो में 7 तीव्रता या उससे अधिक का विनाशकारी भूकंप आने की 70 प्रतिशत संभावना है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, टोक्यो के नीचे इस वक्त कई फॉल्ट लाइन्स बेहद सक्रिय हैं।
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भौगोलिक दृष्टि से टोक्यो एक ऐसी जगह स्थित है जहां पेसिफिक प्लेट, फिलीपीन प्लेट, यूरेशियन प्लेट और नॉर्थ अमेरिकन प्लेट जैसी चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं।
आर्थिक और सामाजिक संकट की आशंका
वर्तमान में टोक्यो न केवल जापान का प्रशासनिक केंद्र है, बल्कि देश की आर्थिक धुरी भी है। जापान की कुल आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी शहर में रहता है और देश की अधिकांश सूचीबद्ध कंपनियों के मुख्यालय भी यहीं स्थित हैं।
ऐसे में यदि टोक्यो में कोई बड़ी आपदा आती है, तो इससे न केवल करोड़ों जिंदगियां प्रभावित होंगी, बल्कि जापान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार एक बैकअप राजधानी तैयार करना चाहती है, जहां से आपातकाल में शासन चलाया जा सके।
ओसाका समेत ये शहर हैं रेस में शामिल
जापान की नई संभावित राजधानी के लिए ओसाका को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। ओसाका अपनी ऐतिहासिक विरासत और मजबूत पर्यटन के लिए जाना जाता है। इसके अलावा मियागी, होक्काइडो और फुकुओका भी इस दौड़ में शामिल हैं।
सरकार ने बताया है कि नई राजधानी के चयन के लिए चार प्रमुख पैमानों मजबूत सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक स्थिरता, जनसंख्या का उचित आकार और प्रशासनिक क्षमता को आधार बनाया जाएगा।
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टोक्यो कब बनी जापान की राजधानी?
जापान की राजधानी के रूप में टोक्यो का सफर साल 1868 में शुरू हुआ था। हालांकि, दूसरी राजधानी बनाने की चर्चा साल 2010 से ही चल रही थी, जिसे अब धरातल पर उतारा जा रहा है। इस बीच, जापान के विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक लाभ से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि इस योजना का फायदा कुछ खास राजनीतिक पार्टियों को मिल सकता है।
