सांकेतिक तस्वीर
Honshu Earthquake 6.2 Magnitude: दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक जापान में गुरुवार को एक बार फिर धरती कांप उठी। स्थानीय समयानुसार शाम के समय जापान के पूर्वी तट के पास होन्शू क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप महसूस किया गया। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस (GFZ) के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र जमीन से महज 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर था।
विभिन्न वैश्विक एजेंसियों ने भूकंप की तीव्रता और गहराई को लेकर अलग-अलग आंकड़े साझा किए हैं। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, झटके की तीव्रता 6.3 मापी गई और इसका केंद्र टोक्यो से लगभग 517 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रशांत महासागर में 60 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। तीव्रता में इस मामूली अंतर के बावजूद झटके क्षेत्र के कई हिस्सों में महसूस किए गए।
राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी बड़े जान-माल के नुकसान या हताहत होने की खबर नहीं मिली है। हालांकि, भूकंप के बाद तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया था। जापानी अधिकारी और वैज्ञानिक वर्तमान में स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं क्योंकि आने वाले घंटों में आफ्टरशॉक्स आने की पूरी संभावना बनी हुई है।
जापान भौगोलिक रूप से प्रशांत महासागर के भूकंपीय क्षेत्र ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है जिसके कारण यह दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। यहां धरती के भीतर होने वाली हलचलों के चलते बार-बार भूकंप आते रहते हैं जिससे जनजीवन और बुनियादी ढांचे पर खतरा बना रहता है।
यह भी पढ़ें:- G-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने फ्रांस पहुंचे एस जयशंकर, यूक्रेन युद्ध से लेकर इन मुद्दों पर चर्चा
इसी संवेदनशील स्थिति को देखते हुए जापान ने आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद सख्त और उन्नत मानक विकसित किए हैं। इमारतों का निर्माण विशेष तकनीकों के साथ किया जाता है ताकि वे भूकंप के झटकों को सह सकें वहीं लोगों को भी नियमित रूप से आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
लगातार भूकंपीय गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए सरकारी एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन समय-समय पर चेतावनियां जारी करते रहते हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने, सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की अपील की है ताकि संभावित नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।