जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी और एस जयशंकर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Jaishankar Motegi Discuss India Japan: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच भारत ने अपनी सक्रिय कूटनीति तेज कर दी है। इसी कड़ी में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अपने जापानी समकक्ष और मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता की। इन वार्ताओं का मुख्य केंद्र बिंदु Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खुला रखना और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना रहा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के साथ टेलीफोन पर विस्तार से बातचीत की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की ताजा स्थिति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सुरक्षित रूप से खोलने पर विचार-विमर्श किया। जापानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान मिडिल ईस्ट में नेविगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा एवं संसाधनों की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने पर सहमति बनी।
एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि इस बातचीत में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सहित क्षेत्रीय विकास पर चर्चा हुई। विशेष रूप से, जापानी विदेश मंत्री मोटेगी ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की, जिसके लिए जयशंकर ने उनका आभार जताया।
जापान के साथ वार्ता से ठीक एक दिन पहले, एस जयशंकर ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन रामगुलाम से मुलाकात की। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित की गईं। दोनों नेताओं ने पिछले एक साल में भारत-मॉरीशस की व्यापक साझेदारी में हुई ठोस प्रगति की समीक्षा की।
बैठक के दौरान विकास सहयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) पर विशेष जोर दिया गया। जयशंकर ने बताया कि चर्चा में पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और उनके वैश्विक प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार किया गया। भारत ने मॉरीशस की चिरस्थायी मित्रता के प्रति प्रधानमंत्री रामगुलाम की अटूट प्रतिबद्धता का तहे दिल से सम्मान किया है।
मौजूदा युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली शिपिंग में बाधा आने से पूरी दुनिया में संसाधनों की कमी का खतरा पैदा हो गया है। भारत, जापान और मॉरीशस जैसे देशों का एक साथ आना यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस संकट के समाधान के लिए बहुपक्षीय कूटनीति पर भरोसा कर रहा है।
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भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता न केवल उसके अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह हिंद महासागर और पश्चिम एशिया में एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के बढ़ते प्रभाव को भी रेखांकित करती है।