जंग में मीडिया भी सुरक्षित नहीं! लेबनान में इजरायली स्ट्राइक में 3 पत्रकारों की मौत, गाड़ियों के उड़े परखच्चे
Israeli Airstrike Lebanon: दक्षिणी लेबनान के जज़ीन जिले में एक इजरायली हवाई हमले में अल-मनार और अल-मायादीन टीवी के तीन पत्रकारों की मौत हो गई है।
- Written By: अमन उपाध्याय
इजरायली स्ट्राइक के चपेट में आई कार, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Lebanon Airstrike Journalists Killed: लेबनान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच शनिवार, 28 मार्च 2026 को एक दुखद घटना सामने आई है। दक्षिणी लेबनान के जज़ीन जिले में हुए एक इजरायली हवाई हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो गई है। ये पत्रकार युद्ध की जमीनी हकीकत को दुनिया के सामने लाने के लिए रिपोर्टिंग कर रहे थे। मलबे से पत्रकारों के जले हुए प्रेस हेलमेट और सुरक्षा उपकरण बरामद किए गए हैं, जो हमले की विभीषिका को बयां कर रहे हैं।
मारे गए पत्रकारों की पहचान
लेबनानी मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, इस हमले में अल-मनार टीवी के संवाददाता अली शोएब की मौत हो गई। अली शोएब पिछले तीन दशकों से दक्षिणी लेबनान में युद्ध रिपोर्टिंग का एक जाना-माना चेहरा थे। उनके साथ ही बेरूत स्थित अल-मायादीन टीवी की रिपोर्टर फातिमा फतौनी और उनके भाई, वीडियो पत्रकार मोहम्मद फतौनी ने भी इस हमले में अपनी जान गंवाई है। फातिमा हमले से कुछ ही समय पहले लाइव रिपोर्टिंग कर रही थीं।
इजरायल का दावा
इजरायली सेना ने इस हमले की पुष्टि करते हुए दावा किया कि उन्होंने अली शोएब को निशाना बनाया था। सेना ने आरोप लगाया कि शोएब हिजबुल्लाह के खुफिया एजेंट के रूप में काम कर रहे थे और इजरायली सैनिकों की लोकेशन साझा कर रहे थे। हालांकि, इजरायल ने इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया है।
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दूसरी ओर, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे एक ‘जघन्य अपराध’ बताया है जो पत्रकारों की सुरक्षा करने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समझौतों का उल्लंघन करता है।
पत्रकारों पर बढ़ता खतरा
लेबनान में इस वर्ष अपनी जान गंवाने वाले मीडियाकर्मियों की संख्या बढ़कर पांच तक पहुंच गई है जो हालात की गंभीरता को दर्शाता है। हाल ही में हुए एक अन्य हमले में अल-मनार टीवी के राजनीतिक कार्यक्रमों के प्रमुख मोहम्मद शेरी और उनकी पत्नी की भी मौत हो गई थी जिससे मीडिया जगत में शोक और चिंता का माहौल है। लगातार हो रहे इन हमलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संघर्ष क्षेत्रों में काम कर रहे पत्रकार कितने असुरक्षित हैं।
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इस बीच, मानवाधिकार संगठनों और Committee to Protect Journalists ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि युद्धग्रस्त इलाकों में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है क्योंकि वे ही दुनिया तक सच्चाई पहुंचाने का काम करते हैं।
