ईरान-अमेरिका जंग की आग में झुलसा बहरीन! शिया विद्रोह से 'रिजीम चेंज' का बढ़ा खतरा, क्या गिर जाएगी राजशाही?

Bahrain Shia Protest: ईरान-अमेरिका युद्ध का असर अब बहरीन में 'रिजीम चेंज' की आहट दे रहा है। शिया एक्टिविस्ट की कस्टडी में मौत और बढ़ती गिरफ्तारियों ने 2011 जैसे विद्रोह की आशंका बढ़ा दी है।
Bahrain Scorched by the Flames of the Iran-US Conflict! Rising Threat of 'Regime Change' Amidst Shia Uprising Will the Monarchy Fall?
बहरीन में शिया विद्रोह, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Bahrain Iran War Impact: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष की तपिश अब अरब मुल्क बहरीन के भीतर तक पहुंच गई है। जहां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान में सत्ता परिवर्तन की अटकलें लगाई जा रही हैं वहीं जमीनी हकीकत यह है कि बहरीन में आंतरिक विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई है। शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं जिससे देश की सुरक्षा और राजशाही के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

मोहम्मद अलमोसावी की मौत ने सुलगाई आग

बहरीन में तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब 32 वर्षीय शिया एक्टिविस्ट मोहम्मद अलमोसावी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान उनके साथ गंभीर यातनाएं दी गईं जिसके कारण उनकी जान चली गई। इस घटना के बाद से ही बहरीन के शिया बहुल इलाकों में हिंसक प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

अल्पसंख्यक शासन और बहुसंख्यक विद्रोह

बहरीन की सामाजिक और राजनीतिक संरचना लंबे समय से एक नाजुक संतुलन पर टिकी हुई है। यहां की कुल आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा शिया समुदाय का है लेकिन देश की कमान अल्पसंख्यक सुन्नी शासकों के हाथों में है। मौजूदा ईरान-अमेरिका युद्ध ने इस पुराने धार्मिक और राजनीतिक असंतुलन को फिर से हवा दे दी है। रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के बाद से अब तक 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिनमें अधिकांश शिया मुस्लिम हैं। इन पर देशद्रोह, जासूसी और राजशाही के खिलाफ नफरत फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अमेरिकी ठिकानों का विरोध

बहरीन की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है क्योंकि यहां अमेरिका के 'फिफ्थ फ्लीट' का मुख्यालय स्थित है। बहरीन सरकार ने इजरायल के साथ भी अपने संबंधों को सामान्य किया हुआ है जो आम जनता, विशेषकर शिया समुदाय को नागवार गुजर रहा है। प्रदर्शनकारी खुलेआम अमेरिकी ठिकानों पर ईरान समर्थित हमलों का समर्थन कर रहे हैं जिससे सरकार के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

क्या फिर लौटेगा 'अरब स्प्रिंग'?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो बहरीन में 2011 के 'अरब स्प्रिंग' जैसे हालात दोबारा पैदा हो सकते हैं। उस समय भी बड़े पैमाने पर विद्रोह हुआ था जिसे कड़ी सैन्य कार्रवाई से दबाया गया था। वर्तमान में बहरीन इंस्टीट्यूट फॉर राइट्स एंड डेमोक्रेसी जैसे संगठनों का दावा है कि पूरे देश में 'डर और आतंक का माहौल' है जहां सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर भी लोगों को जेल में डाला जा रहा है।

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