चीन में तेल रिफायइनरी (फोटो-सोशल मीडिया)
Israel Iran War Day-4 Updates: इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग आज अपने चौथे दिन में प्रवेश कर चुकी है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, इस युद्ध की लपटें केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित न रहकर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रही हैं। जहाँ एक ओर इजराइल ने लेबनान की सीमाओं पर कब्जे का आदेश दे दिया है, वहीं पाकिस्तान जैसे देशों ने इस संघर्ष को जायनिस्ट एजेंडा बताते हुए दुनिया के लिए खतरा घोषित कर दिया है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया के माध्यम से इजराइल और जायनिस्ट विचारधारा पर कड़ा प्रहार किया है। आसिफ ने कहा कि मुस्लिम दुनिया में जितनी भी अस्थिरता है, उसकी मुख्य वजह जायनिज्म (इजराइल) है। उन्होंने इसे पूरी मानवता के लिए एक बड़ा खतरा बताया। ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि ईरान इस संघर्ष को बातचीत के जरिए सुलझाने को तैयार था, लेकिन अमेरिका और इजराइल ने यह युद्ध उस पर थोपा है।
आसिफ ने यह भी चेतावनी दी कि यह युद्ध पाकिस्तान की सीमा तक इजराइली प्रभाव लाने की एक साजिश है। उनके अनुसार, अफगानिस्तान, ईरान और भारत को मिलाकर एक ऐसा गठबंधन बनाने की कोशिश की जा रही है जिससे पाकिस्तान की सरहदें असुरक्षित हो जाएं। उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को देश की सुरक्षा की एकमात्र ढाल बताया।
पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने नवाज शरीफ सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि पाकिस्तान को तत्काल प्रभाव से डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से बाहर आ जाना चाहिए। लोधी का आरोप है कि इस बोर्ड की आड़ में इजराइल को गाजा और अन्य क्षेत्रों में हमले करने की छूट मिली है। उनका कहना है कि पाकिस्तान को शुरू से ही इस गठबंधन का हिस्सा नहीं बनना चाहिए था।
युद्ध के मैदान से आ रही खबरें दिल दहला देने वाली हैं। ईरान में इजराइली और अमेरिकी हमलों के कारण अब तक 742 लोगों की जान जा चुकी है। सबसे दुखद पहलू यह है कि मरने वालों में 176 मासूम बच्चे शामिल हैं। घायलों की संख्या 750 के पार पहुँच चुकी है, जिससे ईरान के अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी हो गई है।
तमाम विरोधों के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने रुख पर अडिग हैं। उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ यह अभियान बहुत लंबा या अंतहीन नहीं होगा। नेतन्याहू ने उम्मीद जताई कि यह युद्ध क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने ‘अब्राहम अकॉर्ड’ का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पूर्व में अरब देशों के साथ शांति स्थापित हुई थी, वैसे ही अमेरिका के सहयोग से भविष्य में और भी देशों के साथ समझौते संभव होंगे।
युद्ध का दायरा अब लेबनान तक फैल गया है। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने पुष्टि की है कि सेना को लेबनान के सीमावर्ती क्षेत्रों पर कब्जा करने का अधिकार दे दिया गया है। यह कदम हिज्बुल्लाह की ओर से होने वाली गोलीबारी को रोकने के लिए उठाया गया है। इधर, लेबनान की आधिकारिक सेना ने सीमावर्ती चौकियों को खाली कर पीछे हटना शुरू कर दिया है। कम से कम सात प्रमुख चौकियां अब इजराइली नियंत्रण या नो-मैन्स लैंड के दायरे में आ सकती हैं।
इस युद्ध का सबसे बड़ा आर्थिक प्रभाव चीन में देखने को मिल रहा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक चीन की दिग्गज कंपनी ‘झेजियांग पेट्रोकेमिकल कॉर्प’ ने अपना परिचालन 20 प्रतिशत तक कम कर दिया है। सऊदी अरामको के समर्थन वाली इस कंपनी ने अपनी बड़ी क्रूड यूनिट को बंद करने का फैसला किया है।
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इसका मुख्य कारण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में शिपिंग का रुकना है। ईरान ने इस रास्ते को पूरी तरह बाधित कर दिया है, जहाँ से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति होती है। यदि यह स्थिति कुछ दिन और बनी रही, तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आना तय है।
यूरोपीय देश फ्रांस ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा है कि अगर उनके सहयोगी देश मदद मांगते हैं, तो फ्रांस सैन्य हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा। मध्य पूर्व में लगभग 4 लाख फ्रांसीसी नागरिक रहते हैं, जिनकी सुरक्षा फ्रांस के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। फ्रांस अपनी नौसेना और वायुसेना को अलर्ट मोड पर रखे हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर नागरिकों का रेस्क्यू किया जा सके।
युद्ध का यह चौथा दिन वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था के लिए काला दिन साबित हो रहा है। जहाँ सैन्य ताकतें एक-दूसरे को मिटाने पर तुली हैं, वहीं आम नागरिक और वैश्विक बाजार इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। आने वाले 24 घंटे इस संघर्ष की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।