एक और तख्तापलट की अमेरिकी साजिश? इराक-सीरिया-वेनेजुएला के बाद ईरान की बारी, खामेनेई को खत्म कर पाएंगे ट्रंप?
Donald Trump Regime Change Claim in Iran: विश्व के मानचित्र पर ईरान को एक ऐसे देश के तौर पर जाना जाता है जिसकी राजनैतिक व्यवस्था दशकों से अटल और मजबूत होने के साथ-साथ रहस्यमयी भी है।
- Written By: अभिषेक सिंह
सांकेतिक तस्वीर (AI जनरेटेड)
Iran Internal Politics and US: विश्व के मानचित्र पर ईरान को एक ऐसे देश के तौर पर जाना जाता है जिसकी राजनैतिक व्यवस्था दशकों से अटल और मजबूत होने के साथ-साथ रहस्यमयी भी है। जबकि मौजूदा वक्त में इस व्यवस्था के कमजोर होने और मुल्क में तख्तापलट जैसी संभावनाओं के प्रबल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ईरान को लेकर शुरू हुई इन चर्चाओं के बीच सवाल यह है कि क्या ये संकेत असली हैं? क्या ईरान की जनता वाकई वहां की शासन व्यवस्था से परेशान हो चुकी है और बदलना चाहती है? या ईरान में वही पुराना फार्मूला दोहराया जा रहा है, जिसकी वजह से संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहले अफगानिस्तान उसके बाद इराक और सीरिया जैसे देशों पर हमला किया है?
ईरान में खामेनेई के पास सुप्रीम पॉवर
इन सवालों के जवाब जानने से पहले ईरान के मौजूदा बैकग्राउंड को समझते हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान एक इस्लामिक रिपब्लिक रहा है। यहां सबसे बड़ी ताकत सुप्रीम लीडर के पास होती है। मौजूदा सुप्रीम लीडर अली खामेनेई हैं। इस सिस्टम में समय-समय पर सुधार और विरोध दिखा है, लेकिन शासन का स्वरूप वैसा ही बना हुआ है।
सम्बंधित ख़बरें
White House Firing: व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग से हड़कंप, हमलावर की तस्वीर आई सामने; कौन है मास्टरमाइंड?
एनरिच्ड यूरेनियम छोड़ने को तैयार हुआ तेहरान, ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर किया बड़ा दावा, कहा- जल्द होगी घोषणा
व्हाइट हाउस के पास फिर चली गोलियां, हमलावर ने 25 राउंड की फायरिंग, घटना के वक्त अंदर थे डोनाल्ड ट्रंप
Chemical Leak: कैलिफोर्निया में खतरनाक केमिकल का रिसाव, 40000 लोगों को शहर खाली करने का सख्त आदेश
ट्रंप की ईरान में ‘रिजीम चेंज’ की मांग
हाल के महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों और उनके अधिकारों के लिए चिंता जताते हुए अरब सागर में ईरान के पास मिलिट्री डिप्लॉयमेंट को काफी बढ़ा दिया है। इसी अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान में आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। इसके बावजूद ट्रंप ईरान में ‘रिजीम चेंज’ की मांग कर रहे हैं। यह दावा उन्होंने वेनेजुएला के संदर्भ में किया है।
आखिर क्या चाहते हैं ईरान के लोग?
दूसरा सवाल यह है कि क्या ईरान के अंदर सच में ‘रिजीम चेंज’ के लिए जमीन तैयार की जा रही है या यह सिर्फ एक बाहरी कहानी है? ईरानी लोगों के अंदर मौजूदा रिजीम के खिलाफ नाराजगी है। महंगाई, बेरोज़गारी, और सामाजिक और सांस्कृतिक पाबंदियां इसके मुख्य कारण हैं। ईरान पर लंबे समय से थोपे गए अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध भी इसकी जड़ में हैं।
ईरान की राजनीति ओर अमेरिका (इन्फोग्राफिक-AI)
ईरान में इस्लामिक रिजीम के खिलाफ नाराज़गी 2022-23 के बाद और गहरी हो गई, और जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में एक बड़ा युवा ग्रुप बदलाव की मांग करता देखा गया। हालांकि, यह मांग रिजीम चेंज से ज्यादा आर्थिक सुधारों और सामाजिक-सांस्कृतिक पाबंदियों से आज़ादी की थी। ईरान के ग्रामीण और पारंपरिक समुदायों में इस्लामिक रिपब्लिक के लिए सपोर्ट मज़बूत बना हुआ है।
ईरान की जनता क्यों ज्यादा परेशान?
हाल ही में ईरान ने अपना 47वां नेशनल डे (ईरान में इस्लामिक क्रांति का दिन) मनाया। सड़कों पर उतरी भीड़ ने एक राजनीतिक संदेश दिया कि ईरानी लोग इस्लामिक रिजीम के साथ एकजुट हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि ईरान की जनता देश की व्यवस्था में सुधार चाहती है, लेकिन राजनैतिक व्यवस्था से उसे परेशानी नहीं है।
‘तख्तापलट’ ट्रंप के लिए आसान नहीं
ईरान में अमेरिका का वेनेजुएला जैसा कदम उठाना फिलहाल दूर की कौड़ी लगता है। पिछले साल के हमलों के बाद ईरान ने अपने न्यूक्लियर एनरिचमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया है। दशकों के दबाव, आर्थिक पाबंदियों, यूएस की उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने की कोशिशों और इलाके में असर के बावजूद ईरान ने खुद को एक ताकतवर मिलिट्री पावर के तौर पर स्थापित किया है।
क्या है ईरान की सबसे बड़ी ताकत?
ईरान का बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जो यूएस और इजरायल के बीच बैलेंस बनाता है। जून 2025 के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने दोनों देशों के एयर डिफेंस की कमियों को सामने ला दिया और उन्हें एहसास दिलाया कि ईरान की मिसाइल पावर इस इलाके में उनके लिए एक बड़ा खतरा है। यही वजह है कि US ने न्यूक्लियर बातचीत में ईरान से अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को रोकने की मांग करना शुरू कर दिया।
यह भी पढ़ें: ईरान पर ट्रंप के दो बड़े विकल्प: ‘टोकन’ परमाणु समझौता या खामेनेई पर सीधा सैन्य हमला
अमेरिका और इजरायल के साथ उस 12 दिन के झगड़े ने ईरान को अपनी मिलिट्री क्षमताओं, खासकर अपने एयर डिफेंस और बैलिस्टिक मिसाइल कमांड और कंट्रोल सिस्टम को मॉडर्न बनाने पर मजबूर कर दिया। चीन की मदद से, ईरान इन सिस्टम को ज्यादा इंटीग्रेटेड और सटीक बना रहा है।
मजबूत नहीं हैं ‘रिजीम चेंज’ के दावे
ट्रंप प्रशासन के ‘रिजीम चेंज’ के दावे ईरान में जमीन पर उतने मजबूत नहीं लग रहे हैं, जितना उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है। ईरान की आर्थिक चुनौतियों के बीच व्यवस्था फिलहाल सही है। हालांकि आर्थिक दबाव और उम्मीदों में अंतर बढ़ता है तो नाराजगी आक्रोश में तब्दील हो सकती है।
