'मोदी ने ट्रंप को नोबेल लायक नहीं समझा', अमेरिकी सांसद ने खोली पोल, बताई भारत पर 50% टैरिफ लगाने की वजह

India-US Relations: सीनेटर मार्क वार्नर ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ निजी असंतोष में लगाया, न कि वास्तविक आर्थिक कारणों से।
Trump India Tariff Mark Warner
अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वॉर्नर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Trump India Tariff Mark Warner: अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। अमेरिका के डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वॉर्नर ने दावा किया है कि यह फैसला पूरी तरह आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि निजी कारणों से प्रेरित था। उनका आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराज थे, क्योंकि मोदी ने ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित नहीं किया।

वर्जीनिया में अहमदिया मुस्लिम समुदाय के एक कार्यक्रम में बोलते हुए वॉर्नर ने कहा कि किसी भी देश की आर्थिक नीति व्यक्तिगत असंतोष या निजी हितों पर आधारित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भारत पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया, तो इसके पीछे मुख्य वजह ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी थी। वॉर्नर के अनुसार, ऐसी सोच अमेरिका की दीर्घकालिक आर्थिक और कूटनीतिक विश्वसनीयता को कमजोर करती है।

भारत पर लगाया था 50 प्रतिशत टैरिफ

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पहले भारत पर 25 प्रतिशत “रेसिप्रोकल टैरिफ” लगाया था। इसके बाद 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया, जिसे रूसी तेल खरीदने के कारण दंडात्मक कदम बताया गया। इस फैसले के बाद भारत पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया, जो ब्राजील के साथ दुनिया में सबसे अधिक स्तर पर पहुंच गया। ट्रंप ने उस समय आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन में चल रहे युद्ध के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अप्रत्यक्ष मदद कर रहा है।

हालांकि, वॉर्नर का बयान ट्रंप के आधिकारिक दावे से अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वॉर्नर, जो अमेरिकी सीनेट की इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन हैं, पहले भी ट्रंप के बयानों पर सवाल उठाते रहे हैं। मई 2025 में “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष को रोका। इस पर वॉर्नर ने कहा था कि उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार यह मामला दोनों देशों ने आपसी स्तर पर सुलझाया था।

वॉर्नर ने पहले भी दी थी चेतावनी

भारत-अमेरिका संबंधों के समर्थक माने जाने वाले वॉर्नर ने पहले भी चेतावनी दी थी कि क्वाड और टू-प्लस-टू संवाद जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा ढांचे की रफ्तार धीमी हो रही है। उनका कहना है कि पारंपरिक कूटनीति और सुरक्षा तंत्र पर कम ध्यान देने से सहयोगी देशों के बीच अमेरिका की विश्वसनीयता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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