अमेरिका में ईरानी 'स्लीपर सेल' का बड़ा खतरा, एआई डिजाइन फोटो
US Iran War Latest News: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की सुगबुगाहट के बीच एक बेहद डरावनी खबर सामने आई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिका के भीतर ईरान के कम से कम 750 स्लीपर सेल एजेंट एक्टिव हो चुके हैं। यह खुलासा न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि इसने अमेरिकी प्रशासन में भी हड़कंप मचा दिया है। बताया जा रहा है कि ये एजेंट किसी भी समय बड़े हमले को अंजाम देने के लिए तैयार बैठे हैं।
रिपब्लिकन सांसद बराद कन्नोट ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पहले लगभग 1500 संदिग्ध एजेंटों को ट्रंप सरकार ने चिन्हित कर रखा था। हालांकि, इनमें से 750 एजेंटों को छोड़ दिया गया, जो अब अमेरिका के अलग-अलग कोनों में छिपकर बैठ गए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है और आरोप लगाया है कि उन नीतियों के कारण ही ईरानी स्लीपर सेल को अमेरिका में अपनी जड़ें मजबूत करने का मौका मिला।
ईरान की रणनीति केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं है बल्कि वह अमेरिका की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘टेक सेक्टर’ पर प्रहार करना चाहता है। एफबीआई (FBI) द्वारा जारी एक अलर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) कैलिफोर्निया स्थित वैश्विक टेक दिग्गजों पर ड्रोन हमला कर सकता है।
इस हमले का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में चल रही टेक सेवाओं को बाधित करना और डिजिटल बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाना है। कैलिफोर्निया जैसे रणनीतिक स्थान पर हमला करके ईरान वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं को ठप करना चाहता है।
खुफिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि इन स्लीपर सेल्स के निशाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ अमेरिकी सरकार के कई शीर्ष अधिकारी और पूर्व एनएसए जॉन बॉल्टन जैसे लोग हैं। इसके अलावा, अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रह रहे लगभग 7 लाख ईरानी मूल के नागरिक भी इन एजेंटों के रडार पर हैं जो कि एक बड़ी मानवीय चिंता का विषय है। ये एजेंट बहुत ही शातिराना तरीके से काम करते हैं। हाल ही में एफबीआई ने एक कोडेड संदेश को इंटरसेप्ट किया है जिसका सांकेतिक अर्थ ‘सभी के एक्टिव होने का समय’ बताया जा रहा है।
यह भी पढ़ें:- ट्रंप की एक जिद ने दुनिया को तेल-गैस संकट में झोंका, भारत ही नहीं अमेरिका-इजरायल में भी मची खलबली
ईरान के ये स्लीपर सेल सीधे तौर पर सामने आने के बजाय अक्सर ‘किराए के हत्यारों’ और स्थानीय अपराधियों का सहारा लेते हैं। इसके लिए वे पैसे का लालच या फिर दबाव और ब्लैकमेलिंग का उपयोग करते हैं। इसी महीने की शुरुआत में एक पाकिस्तानी मूल के निवासी ने अमेरिकी जेल में यह स्वीकार किया था कि वह ईरानी स्लीपर सेल के लिए काम कर रहा था। इनका प्राथमिक उद्देश्य टारगेट किलिंग के जरिए देश के भीतर भारी हिंसा और अराजकता फैलाना है जिससे पूरा मुल्क अशांत हो जाए।