खर्ग आइलैंड पर कब्जे की साजिश? 8 अरब देशों के एक साथ आने से भड़का ईरान, अब छिड़ेगी आर-पार की जंग!
US-Iran War: ईरान ने अरब देशों को चेतावनी दी है कि यदि खर्ग आइलैंड पर कब्जे के लिए अमेरिका की मदद की गई, तो उनके बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया जाएगा। मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है।
- Written By: अक्षय साहू
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Warns Gulf Countries: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की जंग अब क्षेत्रीय स्तर पर फैलने की संभावना जताई जा रही है। लंबे समय से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अरब देशों से इस संघर्ष में शामिल होने की अपील कर रहे थे, और अब संकेत मिल रहे हैं कि यह जंग पूरे रीजन में फैल सकती है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने हाल ही में कहा कि उनके पास खुफिया जानकारी है कि एक अरब देश अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खर्ग आइलैंड पर कब्जा करने की योजना बना रहा है। गालिबफ ने अपनी पोस्ट में लिखा कि ईरानी इंटेलिजेंस को पुख्ता डेटा मिला है और यह हमला ईरान के पड़ोसी देश की मदद से किया जाएगा।
अमेरिका का साथ दिया तो झेलना होगा नुकसान
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा हुआ, तो उस देश को भी भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन जानकार मान रहे हैं कि यह संभवतः संयुक्त अरब अमीरात (UAE) हो सकता है।
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स्पीकर गालिबफ ने कहा, “कुछ डेटा के आधार पर हमारे दुश्मन, क्षेत्रीय किसी देश के समर्थन से, ईरान के एक द्वीप पर कब्जा करने की तैयारी कर रहे हैं। हमारी सशस्त्र सेनाएं इन गतिविधियों की पूरी निगरानी कर रही हैं। यदि वे सीमा पार करते हैं, तो उस देश का समस्त महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा हमारे निरंतर हमलों का निशाना बनेगा।”
अरब देशों ने जारी किया संयुक्त बयान
इसी बीच, आठ अरब देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान और उसके प्रॉक्सी की ओर से क्षेत्र में हो रहे हमलों की निंदा की है। कतर, कुवैत, UAE, बहरीन, सऊदी अरब और जॉर्डन ने इस बयान में कहा कि ईरान की कार्रवाइयां उनकी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं। साथ ही, उन्होंने अपने देश को जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखने का भी स्पष्ट संकेत दिया।
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ये घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि मिडिल ईस्ट में हालात और गंभीर हो सकते हैं, और अमेरिका-ईरान संघर्ष अब केवल दो देशों की जंग नहीं रहकर पूरे क्षेत्रीय ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ती जा रही है कि यदि अरब देशों की सीधे एंट्री होती है, तो यह एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
