ईरान पर हमला कर सकता है इस्लामिक नाटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
Islamic NATO Attack on Iran: पाकिस्तान, सऊदी अरब और अजरबैजान के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों के कारण अब ईरान के खिलाफ संभावित हमले का खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर से मुलाकात के बाद रक्षा समझौते को सक्रिय करने की बात कही। यह समझौता सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ था।
इस समझौते के अनुसार, यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह व्यवस्था कुछ हद तक NATO के अनुच्छेद 5 जैसी है, इसलिए पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए इस समझौते को अक्सर “इस्लामिक नाटो” कहा जाता है। हालांकि पाकिस्तान ने अभी तक सीधे युद्ध में शामिल होने के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान से मिलने पहुंचे। जिसके बाद चर्चा तेज हो गई।
Met with Pakistan’s Chief of Army Staff and Chief of Defense Forces, Field Marshal Asim Munir. We discussed Iranian attacks on the Kingdom and the measures needed to halt them within the framework of our Joint Strategic Defense Agreement. We stressed that such actions undermine… pic.twitter.com/OuELnf9LU6 — Khalid bin Salman خالد بن سلمان (@kbsalsaud) March 7, 2026
ईरान के खिलाफ इस मोर्चे में अजरबैजान भी शामिल हो सकता है। अजरबैजान, जो इजरायल के साथ मजबूत रक्षा संबंधों में है। उसने पहले ही ईरान को चेतावनी दी है। ईरान ने अजरबैजान के नखचिवन हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला किया, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। अजरबैजान ने इस हमले के बाद ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार बताते हुए चेतावनी दी है कि वह अब जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
इजरायल, जो पहले ही अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ हवाई हमले कर चुका है, सऊदी अरब और अजरबैजान के साथ अपने सैन्य गठबंधन को मजबूत कर रहा है। हालांकि, इन देशों ने इजरायल के साथ सीधे गठबंधन को नकारते हुए अपनी “संप्रभुता और सुरक्षा” का हवाला दिया है, ताकि अपने घरेलू दर्शकों को नाराज न करें। पाकिस्तान, जो इजरायल का कट्टर विरोधी रहा है, अब उसी इजरायल की मदद करने की स्थिति में आ सकता है, खासकर अगर सऊदी अरब और अजरबैजान पाकिस्तान पर दबाव डालते हैं।
ईरान के लिए स्थिति अधिक जटिल हो सकती है क्योंकि पाकिस्तान और अजरबैजान दोनों देशों की सीमाएं ईरान से मिलती हैं। अगर यह तीनों देश एक साथ हमला करते हैं तो ईरान को दो मोर्चों पर लड़ाई का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा, सऊदी अरब और अजरबैजान के सामरिक सहयोग से ईरान को दक्षिण-पश्चिम और उत्तर दिशा से खतरा हो सकता है, जबकि पाकिस्तान पूर्व से हमला कर सकता है। इस तरह से चारों ओर से घेराबंदी होने से ईरान की मिसाइल डिफेंस प्रणाली पर दबाव बढ़ जाएगा।
ईरान की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है क्योंकि उसकी आंतरिक स्थिति भी अत्यधिक अस्थिर हो चुकी है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में आंतरिक विद्रोह और अस्थिरता की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में युद्ध छिड़ने से देश में और अधिक अराजकता फैल सकती है, जो ईरान को सीरिया और इराक जैसी स्थिति में धकेल सकता है।
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इसके अलावा, अगर युद्ध बढ़ता है तो आम नागरिकों के लिए खाद्य, पानी और चिकित्सा सुविधाओं का संकट खड़ा हो सकता है, जो मानवीय संकट का रूप ले सकता है। पाकिस्तान को इस युद्ध में शामिल होने से सऊदी अरब और अमेरिका से डॉलर की मदद मिल सकती है, जो उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तान के लिए यह एक जोखिम भरी स्थिति होगी, जहां उसे अपने इस्लामिक भाईचारे के विचारों को पीछे छोड़ते हुए विदेशी दबाव को स्वीकार करना पड़ सकता है।
Ans: संभावित गठबंधन में सऊदी अरब, पाकिस्तान और अजरबैजान का नाम सामने आ रहा है। इन देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण वे ईरान के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर विचार कर सकते हैं।
Ans: सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते के कारण पाकिस्तान पर दबाव बढ़ सकता है। इस समझौते के तहत एक देश पर हमला दोनों के खिलाफ माना जाता है, इसलिए क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर पाकिस्तान को भूमिका निभानी पड़ सकती है।
Ans: अजरबैजान और ईरान के बीच लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव है। नखचिवन क्षेत्र में ड्रोन हमले की घटना के बाद अजरबैजान ने आत्मरक्षा का अधिकार जताते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है।