स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Israel Iran Naval Tension: अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के कारण ईरान अपनी सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक लाइफलाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर नियंत्रण खोता नजर आ रहा है। इस संकरे समुद्री मार्ग से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, जो अब वैश्विक युद्ध का केंद्र बन चुका है। अमेरिकी नौसेना के बढ़ते दबाव के बाद ईरान ने जहाजों को रोकने की गंभीर चेतावनी दी है। वर्तमान युद्ध में अब तक करीब 1230 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे मध्य-पूर्व में हालात बेहद नाजुक हो गए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल ईरान के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा गलियारा माना जाता है। यहां से गुजरने वाला 20 प्रतिशत तेल और 25 प्रतिशत प्राकृतिक गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों की कीमतों को सीधा प्रभावित करते हैं। अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के चरमराने का डर पैदा हो जाएगा जिससे हर देश प्रभावित होगा।
वर्तमान स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि व्यापारी और तेल निर्यातक देश अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश में जुटे हुए नजर आ रहे हैं। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला यह मार्ग रणनीतिक रूप से दुनिया की सबसे संवेदनशील जगह बन गया है। इस इलाके में जहाजों की आवाजाही कम होने से ईंधन की कीमतों में अचानक उछाल आने की पूरी संभावना बनी हुई है।
ईरान के लिए यह समुद्री रास्ता उसकी नौसैनिक शक्ति और क्षेत्रीय वर्चस्व बनाए रखने के लिए एक मजबूत रणनीतिक ढाल की तरह है। यहां तैनात ईरान की तटीय मिसाइलें और घातक ड्रोन उसकी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते रहे हैं जो अब भारी खतरे में हैं। नियंत्रण खोने का मतलब होगा कि ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो जाएगा और उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
नौसेना की सुपरमेसी खत्म होने का डर तेहरान के नेतृत्व को और अधिक आक्रामक फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहा है। ईरान का मानना है कि अगर वह इस मार्ग पर अपनी पकड़ खो देता है, तो पूरे क्षेत्र में उसका वजूद मिट जाएगा। यही कारण है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने और सख्त सैन्य कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी नौसेना की बढ़ती सक्रियता और जवाबी कार्रवाई ने ईरान को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है जिससे उसकी पकड़ कमजोर हुई है। ईरान ने स्पष्ट कहा है कि अगर उसके आर्थिक हितों को कोई भी नुकसान पहुंचा, तो वह इस रास्ते को बंद कर देगा। 1980 के दशक के टैंकर युद्ध जैसी स्थिति दोबारा पैदा होने की आशंका से पूरी दुनिया में भारी बेचैनी देखी जा रही है।
ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख और अमेरिकी संसद में बदलते प्रस्तावों ने आग में घी डालने का काम किया है जिससे शांति की उम्मीद धुंधली है। अमेरिका का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी ईरानी चुनौती का मुकाबला करेगा। दोनों तरफ की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और एक छोटी सी गलती भी विनाशकारी परिणाम ला सकती है जो सबको डरा रही है।
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6 मार्च 2026 तक मिली ताजा जानकारी के अनुसार इस भीषण संघर्ष में अब तक 1230 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है। युद्ध की विभीषिका लगातार बढ़ती जा रही है और सुरक्षा बल अपनी सीमाओं को बचाने के लिए बड़ी से बड़ी कीमत चुका रहे हैं। मासूम जिंदगियों का यह नुकसान दुनिया को यह याद दिला रहा है कि सत्ता की लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान आम आदमी का होता है।
क्षेत्र के लोग डर के साये में जी रहे हैं और उन्हें अपने भविष्य और सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता सताने लगी है। युद्ध के कारण न केवल सैनिक बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और परिवारों पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है जो बेहद हृदयविदारक है। शांति की अपील करने वाले देशों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन युद्ध के मैदान में गूंजती गोलियां फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही हैं।