बातचीत एक तरफ, बदला दूसरी तरफ! ईरान की सीधी चेतावनी- अयातुल्लाह खामेनेई के खून का बदला लेकर ही मानेंगे
Iran US Tension: ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह 28 फरवरी 2026 को हुए हमले में मारे गए अयातुल्लाह खामेनेई की मौत का बदला हर हाल में जरूर लेगा। अमेरिका से वार्ता अभी तक रुकी हुई है।
- Written By: प्रिया सिंह
ईरान अमेरिका तनाव अयातुल्लाह खामेनेई (सोर्स-सोशल मीडिया)
Iran US Tension Amidst Peace Talks: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने का नाम बिल्कुल नहीं ले रहा है। शांति वार्ता की लगातार हो रही कोशिशों के बीच ईरान ने अमेरिका को एक बार फिर बहुत ही गंभीर और बड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने एकदम साफ कहा है कि वह अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई के खून का बदला उनके हत्यारों से हर हाल में लेकर ही रहेगा। लगातार मिल रही इन धमकियों के कारण अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का टकराव आने वाले समय में और भी ज्यादा भयंकर रूप ले सकता है और युद्ध भड़क सकता है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाकर जोलकद्र ने इस संबंध में एक कड़ा संदेश जारी किया है। आपको बता दें कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के एक बड़े हमले में अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो गई थी। इस जानलेवा हमले में ईरान के कई अन्य बड़े और शीर्ष अधिकारियों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस घटना के बाद से ही दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है, जिससे मध्य पूर्व में भारी संकट और अशांति लगातार गहराती जा रही है।
अंतिम संस्कार की तारीख
अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह का आयोजन 4 से 8 जुलाई तक बहुत ही बड़े स्तर पर किया जा रहा है। इस दौरान पूरे देश भर में भयंकर शोक की लहर दौड़ गई है और लोग अमेरिका के खिलाफ अपना भारी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। सेना और सुरक्षा बल भी इस मौके पर किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद और हाई अलर्ट पर रखे गए हैं।
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बातचीत से ईरान का इनकार
अमेरिका और ईरान के बीच अभी सीधी जंग तो रुकी हुई है लेकिन अंदरूनी टेंशन और कड़वाहट पूरी तरह से बरकरार है। ईरान ने एकदम साफ शब्दों में कह दिया है कि वह अमेरिका के साथ तब तक कोई सीधी बातचीत नहीं करेगा जब तक शर्तें पूरी नहीं होतीं। ईरान का यह कड़ा आरोप है कि अमेरिका ने अभी तक पुराने समझौते और वादों को पूरी तरह से नहीं निभाया है और धोखा दिया है।
लेबनान से सेना हटाने की शर्त
ईरान ने अपनी बातचीत के लिए एक बहुत ही बड़ी और अहम शर्त अमेरिका के सामने मजबूती से रखी है। ईरान चाहता है कि जब तक लेबनान से इजरायल की सेना पूरी तरह से नहीं हटती, तब तक कोई भी शांति वार्ता बिल्कुल नहीं होगी। इसी सख्त शर्त के कारण दोहा में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली अहम बातचीत भी नहीं हो पाई है जिससे गतिरोध कायम है।
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दोहा में अमेरिकी दूत
अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेयर्ड कुशनर बातचीत के लिए दोहा पहुंचे हैं। लेकिन ईरानी अधिकारियों ने उनसे किसी भी तरह की कोई भी मुलाकात या बातचीत करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने दावा किया है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
