बंद कर लो समंदर… ईरान ने खोज लिया तेल भेजने का ‘सीक्रेट’ रास्ता, रेल से चीन-पाकिस्तान तक पहुंच रही सप्लाई
Iran Oil Export: अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी के 50 दिनों बाद ईरान ने तेल निर्यात के लिए रेलवे का सहारा लिया है। चीन जाने वाली तेल ट्रेनों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है, जिससे हड़कंप मचा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
रेल तेल टैंकर, AI मॉडिफाइड फोटो
Iran Oil Export Pakistan China By Rail: अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ लागू की गई समुद्री नाकेबंदी अब बेअसर साबित होती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और समुद्री प्रतिबंधों के बीच ईरान ने अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता खोज निकाला है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब समुद्र के बजाय पटरियों के जरिए चीन और पाकिस्तान तक कच्चे तेल और LPG की सप्लाई कर रहा है।
50 दिनों की नाकेबंदी
अमेरिका ने 13 अप्रैल, 2026 को ईरान के खिलाफ सख्त समुद्री नाकेबंदी शुरू की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करना था। हालांकि, इस प्रतिबंध के करीब 50 दिन बीत जाने के बाद भी ईरान का तेल निर्यात जारी है। ईरानी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के दावों के अनुसार, चीन जाने वाली मालगाड़ियों की संख्या में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। रात के अंधेरे में तेल के टैंकरों से लदी लंबी ट्रेनें लगातार मध्य एशिया के रास्ते चीन की ओर जा रही है।
चीन-ईरान रेलवे कॉरिडोर
ईरान ने इस संकट से निपटने के लिए मध्य एशिया के रेल नेटवर्क का रणनीतिक इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 10,400 किलोमीटर लंबा ‘चीन-ईरान रेलवे कॉरिडोर’ है, जिसकी शुरुआत मई 2025 में हुई थी। यह विशाल रेल मार्ग चीन के शियान शहर से शुरू होकर कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों से गुजरते हुए तेहरान तक पहुंचता है।
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Iran EXPORTS OIL and LPG to China and Pakistan VIA RAILWAY Nearly 50 days into US naval BLOCKADE — number of freight trains to China TRIPLES — Fars Long line of tankers rolls through the night pic.twitter.com/r9wx56bpmI — RT (@RT_com) May 29, 2026
इस रेल मार्ग की सबसे बड़ी खूबी इसकी गति है। जहां समुद्री रास्ते से माल पहुंचने में लगभग एक महीने का समय लगता है, वहीं रेल मार्ग से यह दूरी मात्र 15 दिनों में तय हो रही है। इसके अलावा, चीन ने इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ‘चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे परियोजना’ में 2.35 अरब डॉलर का भारी निवेश भी किया है।
क्या रेल मार्ग बन पाएगा समुद्र का स्थायी विकल्प?
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे ने ईरान को तात्कालिक राहत जरूर दी है लेकिन यह समुद्री मार्ग का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकता। इसके पीछे मुख्य कारण क्षमता का अंतर है।
क्षमता का अंतर: एक मालगाड़ी अधिकतम 60,000 से 70,000 बैरल तेल ले जा सकती है, जबकि एक सामान्य तेल टैंकर 6 लाख बैरल और एक बहुत बड़ा क्रूड कैरियर 20 लाख बैरल से अधिक तेल ले जाने में सक्षम होता है।
भौगोलिक चुनौती: ईरान के अधिकांश तेल क्षेत्र दक्षिण में हैं, जबकि चीन की रिफाइनरियां उसके पूर्वी तट पर स्थित हैं। रेल से इतनी लंबी दूरी तक भारी मात्रा में तेल भेजना बेहद खर्चीला और जटिल है।
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आर्थिक प्रभाव ईरान
अगर एक ट्रेन खेप में 70,000 बैरल तेल चीन भेजता है, तो उसे लगभग 52.5 लाख से 70 लाख डॉलर तक की आय होती है। हालांकि यह राशि समुद्री व्यापार से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई के मुकाबले कम है, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को जीवित रखने के लिए ईरान के लिए यह एक जीवनदान साबित हो रहा है।
