मजबूर हो गए खामेनेई! प्रदर्शनों पर पहली प्रतिक्रिया आई सामने, सरकारी मीडिया के जरिए बयां किया दर्द
Iran Protest: ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन, हिंसा और सरकारी कार्रवाई के बीच अमेरिका ने कड़ी चेतावनी दी, जबकि ईरानी सरकार ने विदेशों को दोषी ठहराने की रणनीति अपनाई है।
- Written By: अक्षय साहू
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (सोर्स- सोशल मीडिया)
Protest Against Ayatollah Ali Khamenei: ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और बीते 12 दिनों से देश के बड़े शहरों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी हैं। गुरुवार रात को यह आंदोलन और अधिक उग्र हो गया, जब राजधानी तेहरान समेत 100 से ज्यादा शहरों में स्थिति बेकाबू नजर आई। इसी बीच ईरान की सरकारी टीवी ने पहली बार इस पर चुप्पी तोड़ते हुए विरोध प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार बताया है।
इन घटनाओं के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हमला किया गया तो अमेरिका की ओर से “तगड़ा जवाब” दिया जाएगा। इस चेतावनी के तुरंत बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद करने का फैसला किया, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रदर्शन के पीछे अमेरिका और इजरायल
सम्बंधित ख़बरें
सिचुएशन रूम में 2 घंटे चली ट्रंप की बैठक; व्हाइट हाउस ने ईरान के लिए खींची ‘रेड लाइन’, अब क्या होगा?
होर्मुज में मची खलबली! तेल टैंकरों के रास्ते पर दिखी संदिग्ध बारूदी सुरंग, ओमान ने जारी किया ‘रेड अलर्ट’
लाओस की गुफा बनी काल! सोने की तलाश में फंसे ग्रामीणों का रेस्क्यू जारी; कई देशों के एक्सपर्ट्स बचाव में जुटे
फिट हैं राष्ट्रपति ट्रंप! व्हाइट हाउस ने जारी की मेडिकल रिपोर्ट; लंबाई और वजन का भी हुआ खुलासा
ईरान की सरकारी टीवी ने लंबे समय तक हालात को छिपाने या कमतर दिखाने के बाद अब सरकारी प्रसारक ने एक कार्यक्रम में स्वीकार किया है कि प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई और लोगों के हताहत होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। यह स्वीकारोक्ति अपने आप में इस बात का संकेत है कि हालात अब शासन के लिए छिपाने लायक नहीं रह गए हैं।
हालांकि, सरकार ने हिंसा की जिम्मेदारी जनता के आक्रोश पर डालने से इनकार किया है। सरकारी टीवी का दावा है कि आगजनी और हिंसक घटनाओं के पीछे अमेरिका और इजरायल से जुड़े “आतंकी एजेंट” हैं। इस तरह शासन एक बार फिर अंदरूनी असंतोष को विदेशी साजिश बताने की पुरानी रणनीति पर चलता दिखाई दे रहा है।
बढ़ते दबाव के चलते बदली नीति
बढ़ते दबाव के चलते ईरानी सरकार की रणनीति में बदलाव नजर आ रहा है। पहले जहां प्रदर्शनों को नजरअंदाज किया जा रहा था या मामूली बताने की कोशिश की जा रही थी, अब हताहतों की बात मानकर हालात की गंभीरता स्वीकार करनी पड़ रही है।
यह भी पढ़ें: ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के बाद इंटरनेट बंद, एक पुलिस वाले की चाकू मारकर हत्या, तेहरान में बवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव अली खामेनेई के शासन पर बढ़ते अंदरूनी दबाव का साफ संकेत है। आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और सामाजिक असंतोष ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। मौजूदा हालात में शासन के लिए स्थिति को काबू में रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इस बीच, विरोध प्रदर्शनों, इंटरनेट बंदी और कड़े सुरक्षा कदमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी लगातार बढ़ रही है और पूरी दुनिया की नजरें ईरान पर टिकी हुई हैं।
