ईरान-इजरायल युद्ध से दुबई के रियल एस्टेट में मंदी के संकेत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Israel-Iran War Effect in Dubai Real Estate Industry: मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दुबई के चमकते रियल एस्टेट बाजार को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है। हाल ही में ईरान द्वारा दुबई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों ने इस शहर की ‘सेफ जोन’ वाली पहचान को तगड़ा झटका दिया है। अब वैश्विक निवेश गलियारों में यह बड़ी बहस छिड़ गई है कि क्या यह तनाव दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट में बड़ी मंदी का कारण बनेगा और क्या अनिवासी भारतीय (NRI) अपना पैसा वापस भारत की ओर मोड़ेंगे।
सोशल मीडिया और रेडिट जैसे मंचों पर निवेशक इस स्थिति की तुलना न्यूयॉर्क के 9/11 और मुंबई के 26/11 हमलों के बाद की परिस्थितियों से कर रहे हैं। चर्चा यह है कि क्या दुबई का बाजार भी उसी तरह के ‘शॉक’ से गुजरेगा। हालांकि, कई यूजर्स का तर्क है कि न्यूयॉर्क और मुंबई जैसे बड़े शहर ऐसे भीषण संकटों के बाद भी पूरी तरह नहीं डूबे और कुछ समय बाद वहां का मार्केट फिर से पटरी पर लौट आया। जानकारों का मानना है कि दुबई में मौजूदा स्थिति फिलहाल उन बड़े हमलों के मुकाबले काफी कम है और यह केवल एक “अस्थायी झटका” हो सकता है।
अनिश्चितता के इस माहौल में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या दुबई जाने वाला ‘नया निवेश’ भारत के बड़े महानगरों की ओर मुड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी किसी क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशकों के व्यवहार में “झिझक” दिखने लगती है। यदि मिडिल ईस्ट में यह अनिश्चितता हफ्तों या महीनों तक खिंचती है, तो नए निवेशक दुबई के बजाय भारत के रियल एस्टेट मार्केट को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में देख सकते हैं।
रियल एस्टेट जानकारों के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से दुबई ने क्षेत्रीय संकटों के दौरान जबरदस्त लचीलापन दिखाया है। अतीत के आंकड़े बताते हैं कि तनाव के समय प्रॉपर्टी लेनदेन में अस्थायी कमी तो आती है, लेकिन स्थिर बाजारों में कीमतों की गिरावट अक्सर सिंगल डिजिट (9% से कम) तक ही सीमित रहती है। जैसे ही बादल छंटते हैं, एक-दो तिमाहियों के भीतर स्थितियां फिर सामान्य हो जाती हैं।
तनाव के बावजूद दुबई का ‘गोल्डन वीजा’ एक बड़ा आकर्षण बना हुआ है। 10 साल की रेजिडेंसी और टैक्स-फ्री लाइफस्टाइल जैसे फायदे इतने मजबूत हैं कि भारत और अन्य क्षेत्रों के अमीर निवेशक (HNIs) इसे अपने पोर्टफोलियो के लिए एक ‘बैकअप प्लान’ की तरह देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लग्जरी लाइफ और वीजा की स्थिरता का आकर्षण फिलहाल युद्ध के डर पर भारी पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें: ईरान के बाद इजरायल के निशाने पर ये मुस्लिम देश, तख्तापलट के लिए एक्टिव हुआ यहूद संगठन, PM ने किया खुलासा
वर्तमान में दुबई के रियल एस्टेट लेनदेन में कुछ गिरावट देखी जा सकती है। जहां पश्चिमी निवेशक थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं, वहीं भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति ‘रुको और देखो’ वाली बनी हुई है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो निस्संदेह भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।