ईरान पर कट्टरपंथियों का कब्जा! हर फैसले में बढ़ा IRGC का दखल, लिबरल नेता हुए साइडलाइन-रिपोर्ट
US Iran War: ईरान में IRGC के बढ़ते प्रभाव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने शांति वार्ता को संकट में डाल दिया है। कट्टरपंथी नेताओं ने कूटनीतिक टीम को वापस बुलाकर संघर्ष के संकेत दिए हैं।
- Written By: अक्षय साहू
ईरान पर IRGC का प्रभाव बढ़ा (सोर्स- सोशल मीडिया)
IRGC Control Iran: ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की कोशिशें हाल के घटनाक्रमों के कारण गंभीर संकट में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेना द्वारा में ईरानी कार्गो जहाज पर हमला करने से स्थिति और बिगड़ गई है। इस कार्रवाई ने ईरानी कट्टरपंथी ताकतों को मजबूत किया है और शांति समझौते की संभावनाएं लगातार कम हो रही हैं।
हाल के दिनों में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने लगभग पूरी सैन्य और कूटनीतिक निर्णय लेने की शक्ति अपने हाथ में ले ली है। IRGC के कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों ने ईरानी नेतृत्व में प्रभाव बढ़ा लिया है। वाहिदी को समर्थन से मिला है, जो IRGC के पुराने सदस्य हैं और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव भी हैं।
शांति वार्ता पर IRGC की नाराजगी
रिपोर्ट के मुताबिक, इस गठजोड़ ने वाहिदी की ताकत को बढ़ा दिया है, विशेष रूप से होर्मुज में हाल के सैन्य संघर्षों के बाद, जहां तेज हमलावर नौकाओं का इस्तेमाल बढ़ गया है। इस सत्ता बदलाव का असर कूटनीति पर भी पड़ा है। विदेश मंत्री और संसद नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ जैसी नरम रुख वाली कूटनीतिक टीमों को अब सीमित प्रभाव मिला है।
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इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) के अनुसार, जोलघदर ने बातचीत टीम की कुछ कार्रवाइयों पर नाराजगी जताई और इसके बाद वरिष्ठ IRGC नेताओं ने कूटनीति टीम को वापस तेहराFन बुला लिया। हाल में ईरान ने कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया, जिससे फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंस गए। इससे यह साफ संदेश गया कि तेल मार्ग अब IRGC की सख्त निगरानी में है।
शांति समझौते की संभावना अनिश्चित
ISW के विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान सत्ता संरचना पश्चिमी देशों के साथ किसी भी गंभीर वार्ता को मुश्किल बना देती है। वाहिदी और IRGC के वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव के कारण अमेरिका के साथ नाजुक युद्धविराम और शांति समझौते की संभावना अनिश्चित हो गई है।
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संक्षेप में, अमेरिकी सैन्य दबाव और ईरान में कट्टरपंथियों का बढ़ता प्रभाव शांति वार्ता को खतरे में डाल रहा है। यह स्थिति अमेरिका के कूटनीतिक प्रयासों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है और क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।
