

Strait of Hormuz IRGC New Conditions: ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की घोषणा के बाद अब स्थिति और जटिल होती दिखाई दे रही है। एक तरफ जहां ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने युद्धविराम की अवधि में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खुला” बताया था, वहीं दूसरी ओर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने इस पर नई शर्तें लागू कर दी हैं।
IRGC की नौसेना के अनुसार, अब होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों को उनकी अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नागरिक जहाजों को केवल ईरान द्वारा निर्धारित मार्ग से ही गुजरने की इजाजत होगी, जबकि सैन्य जहाजों के प्रवेश पर अभी भी रोक बरकरार है। ईरानी नौसेना ने इन नियमों को नया आदेश बताया है और दावा किया है कि ये शर्तें युद्धविराम समझौते के अनुरूप हैं।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि अराघची ने अपने आधिकारिक बयान में इन अतिरिक्त शर्तों का जिक्र नहीं किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट कहा था कि लेबनान में लागू युद्धविराम के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन पूरी तरह खुला रहेगा। लेकिन बाद में सामने आए IRGC के निर्देशों ने इस “पूरी तरह खुले” होने के दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। कुछ सरकारी और अर्द्ध-सरकारी मीडिया संस्थानों ने अराघची के बयान को “अधूरा” और “भ्रामक” बताया है। उनका कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा हुई है, जबकि वास्तविक नियंत्रण और शर्तें IRGC तय कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि देश के शीर्ष नेतृत्व के पहले के रुख के अनुसार इस मार्ग को पूरी तरह खोलना रणनीतिक रूप से सही नहीं माना जा रहा।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज अब पूरी तरह खुला है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यदि ईरान किसी समझौते पर नहीं पहुंचता, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू कर सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही ईरान ने मार्ग खोलने की घोषणा की हो, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी फिलहाल जारी रहेगी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इसके “खुला” या “सीमित रूप से नियंत्रित” होने के बीच का अंतर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार और भू-राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।